संसद में परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जारी खींचतान के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से तीन सवाल पूछे हैं। जयराम रमेश ने यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन के मुद्दे पर कोई नया प्रस्ताव लेकर आई है या उसकी योजना पहले खारिज हो चुके संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा पेश करने की है।
इस राजनीतिक विवाद के बीच जयराम रमेश ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के उस पत्र का भी उल्लेख किया, जो उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को लिखा था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पत्र का जवाब दिया था। जयराम रमेश ने रिजिजू के जवाब में उठाए गए बिंदुओं पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उसमें उन वादों का जिक्र नहीं किया गया, जिनका दावा उन्होंने परिसीमन से जुड़ी चर्चाओं के संदर्भ में किया है।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर उठाए सवालकांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को परिसीमन के मुद्दे पर पत्र लिखा था। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उस पत्र का जवाब दिया।
जयराम रमेश के मुताबिक, रिजिजू ने अपने जवाब में मार्च 2026 के दौरान परिसीमन को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री की चुनिंदा चर्चाओं का उल्लेख किया। हालांकि, कांग्रेस नेता ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें उन वादों के बारे में कुछ नहीं बताया गया, जो उनके अनुसार गृह मंत्री ने इन चर्चाओं के दौरान किए थे। जयराम रमेश ने कहा कि रिजिजू के पत्र में इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं है कि गृह मंत्री की ओर से चर्चाओं में किए गए जिन वादों का जिक्र किया जा रहा है, वे उस संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं थे, जिसे 16 अप्रैल 2026 को लाया गया था।
17 अप्रैल को लोकसभा में खारिज हो गया था विधेयकपरिसीमन से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि संबंधित संविधान संशोधन विधेयक 16 अप्रैल 2026 को पेश किया गया था। उनके अनुसार, यह विधेयक अगले दिन यानी 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पूरी तरह और निर्णायक रूप से खारिज हो गया था।
कांग्रेस नेता ने इसी मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार के मौजूदा रुख पर सवाल किया। उनका कहना है कि रिजिजू के जवाब में मार्च 2026 में कुछ राजनीतिक दलों के साथ हुई चर्चाओं का उल्लेख तो किया गया, लेकिन उन चर्चाओं में किए गए बताए जा रहे वादों और बाद में पेश किए गए विधेयक के बीच के अंतर को स्पष्ट नहीं किया गया। जयराम रमेश की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि यदि परिसीमन पर राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के दौरान कुछ आश्वासन दिए गए थे, तो उन पर विधेयक में क्या कदम उठाए गए और सरकार की वर्तमान योजना क्या है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
भाजपा और मोदी सरकार से जयराम रमेश के तीन सवालजयराम रमेश ने परिसीमन के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के सामने तीन सवाल रखे। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या उसके पास परिसीमन को लेकर कोई नया और ठोस प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी भी राजनीतिक दल के साथ चर्चा की हो। उनका दूसरा सवाल सर्वदलीय बैठक को लेकर था। जयराम रमेश ने पूछा कि मोदी सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, अपने नए प्रस्ताव को पारदर्शी तरीके से सामने रखने और एक साझा मंच पर सभी दलों के विचार सुनने से लगातार इनकार क्यों कर रही है। कांग्रेस नेता का तीसरा सवाल उस संविधान संशोधन विधेयक को लेकर था, जिसे उन्होंने पहले खारिज हो चुका बताया। उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार की मंशा उसी विधेयक को दोबारा लाने की है। इन तीन सवालों के जरिए जयराम रमेश ने परिसीमन पर सरकार की योजना, राजनीतिक दलों के साथ बातचीत और प्रस्तावित विधायी कदमों को लेकर स्पष्टता की मांग की है।
मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र पर किरेन रिजिजू ने क्या जवाब दिया था?इस विवाद की पृष्ठभूमि में मल्लिकार्जुन खरगे और किरेन रिजिजू के बीच पत्राचार भी शामिल है। खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन पर विचार करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इसके जवाब में रिजिजू ने पत्र लिखकर इस विषय पर विपक्ष के साथ सरकार की कोशिशों के बारे में तथ्य दर्ज करने की बात कही थी।
रिजिजू ने अपने जवाब में लिखा था, मैं आपको (मल्लिकार्जुन खरगे) बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि आपने संसदीय कार्य मंत्रालय को पत्र लिखा। आपने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन पर विचार से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग की है। मैं इस विषय पर विपक्ष के साथ सरकार की कोशिशों के बारे में तथ्य दर्ज कर रहा हूं।
रिजिजू के इस जवाब में मार्च 2026 में परिसीमन को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के साथ गृह मंत्री की चर्चाओं का भी उल्लेख किया गया था। जयराम रमेश ने इसी बिंदु को उठाते हुए कहा कि जवाब में उन वादों और 16 अप्रैल को पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के बीच के संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया।
इस तरह परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद के साथ-साथ सर्वदलीय बैठक की मांग और पहले पेश किए गए विधेयक को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। जयराम रमेश ने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगा है और यह स्पष्ट करने को कहा है कि परिसीमन को लेकर उसका अगला कदम क्या होगा।