इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच शेयर बाजार पर मंडराया संकट, सोमवार को कैसी रह सकती है चाल, किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सीधा असर

मध्य-पूर्व में तेज हुए सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बिगड़े। जवाबी कदम उठाते हुए ईरान ने इजरायल के साथ कतर, कुवैत, यूएई और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की ओर मिसाइलें दागीं। भारतीय समयानुसार रविवार सुबह यह खबर भी सामने आई कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का निधन हो गया है। इन घटनाओं ने भू-राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिसका असर केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा और इसका पहला संकेत सोमवार सुबह शेयर बाजार खुलते ही मिल सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराया

विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को झकझोर सकता है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की घोषणा कर दी है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल परिवहन का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान स्वयं भी प्रमुख तेल उत्पादक देशों में गिना जाता है। ऐसे में वहां अस्थिरता और निर्यात में रुकावट का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेल बाजार में किसी भी तरह की अनिश्चितता आमतौर पर कीमतों को ऊपर की ओर धकेलती है, जिसका असर आयातक देशों, विशेषकर भारत जैसे बड़े उपभोक्ता राष्ट्र पर अधिक पड़ता है।

सोमवार को बाजार में दबाव की आशंका

बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है। निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा दबाव में आएगा और महंगाई दर पर भी असर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की आशंका से बाजार में घबराहट और बढ़ सकती है।
इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा मार

तेल कीमतों में उछाल का सबसे पहला असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल की लागत बढ़ने से इनके मार्जिन पर दबाव बनता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी बरकरार रहती है तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी बदलाव संभव है।

इसके अलावा एविएशन सेक्टर भी सीधे तौर पर प्रभावित होगा, क्योंकि विमानन कंपनियों के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है। फ्यूल महंगा होने से एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी, जिसका असर टिकट कीमतों पर पड़ सकता है। पेंट उद्योग और टायर निर्माण कंपनियां भी कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल पर निर्भर रहती हैं, इसलिए इनके शेयरों में भी दबाव देखा जा सकता है।

वहीं, लॉजिस्टिक्स, केमिकल्स और प्लास्टिक से जुड़े उद्योगों पर भी लागत बढ़ने का असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, यदि तनाव लंबा खिंचता है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

फिलहाल निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, तेल कीमतों की चाल और सरकार की संभावित नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर टिकी रहेंगी। सोमवार का कारोबारी सत्र इस बात का संकेत देगा कि बाजार इस भू-राजनीतिक संकट को कितनी गंभीरता से ले रहा है।