भारत-US ट्रेड डील पर फिर तेज हुई बातचीत, मोदी-ट्रंप जल्द कर सकते हैं फोन पर चर्चा; अटके मुद्दों को सुलझाने की कोशिश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत एक बार फिर तेज होती दिख रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा है कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और जिन मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बनी है, उनकी पहचान कर ली गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते की घोषणा तुरंत होने की संभावना नहीं है।

ग्रीर ने जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से इतर कहा कि अमेरिका और भारत समझौते को पूरा करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों पक्ष अब उन प्रमुख मुद्दों पर काम कर रहे हैं जो अभी भी बातचीत में अटके हुए हैं। उन्होंने भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई चर्चा को भी सकारात्मक बताया।

मोदी और ट्रंप के बीच फिर हो सकती है बातचीत

ग्रीर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यापार समेत कई मुद्दों पर हाल ही में रचनात्मक बातचीत हुई है। दोनों नेताओं के बीच जल्द एक और फोन पर बातचीत होने की संभावना जताई गई है। इस बातचीत में व्यापार समझौते की मौजूदा स्थिति और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हो सकती है।

30 सितंबर को मोदी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के संबंधों के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों समेत कई विषयों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में भी गतिविधियां बढ़ी हैं।

पीयूष गोयल और जेमीसन ग्रीर की मुलाकात

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान जेमीसन ग्रीर से मुलाकात की। दोनों के बीच भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के रास्तों पर चर्चा हुई। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को आगे बढ़ाना है।

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते की रूपरेखा फरवरी 2026 में जारी संयुक्त बयान में सामने आई थी। उस ढांचे में दोनों देशों ने बाजार पहुंच बढ़ाने, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं से जुड़े मुद्दों को सुलझाने तथा व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई थी।
फरवरी में बनी थी अंतरिम समझौते की रूपरेखा

6 फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने पारस्परिक और लाभकारी व्यापार से जुड़े अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसमें अमेरिका की ओर से भारत के कई उत्पादों पर 18 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क दर लागू करने की बात शामिल थी, जबकि भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने या हटाने की दिशा में प्रतिबद्धताएं जताई थीं।

इस ढांचे में गैर-शुल्क बाधाओं, डिजिटल व्यापार, बाजार पहुंच और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दों पर भी काम करने की बात कही गई थी। साथ ही दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए आगे की बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी।

बातचीत में टैरिफ और बाजार पहुंच अहम मुद्दे

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में शुल्क के अलावा बाजार तक पहुंच और गैर-शुल्क बाधाएं भी महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। जून 2026 में जेमीसन ग्रीर की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों पक्षों ने बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, गैर-शुल्क बाधाओं और आपूर्ति शृंखला जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी। भारत सरकार ने उस समय कहा था कि बातचीत में पर्याप्त प्रगति हुई है और अंतरिम समझौते को व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब ताजा बातचीत में दोनों पक्ष उन बिंदुओं को सुलझाने पर ध्यान दे रहे हैं जिन पर अभी सहमति बाकी है। ग्रीर ने संकेत दिया है कि वार्ता अंतिम हिस्से में पहुंच चुकी है, लेकिन फिलहाल समझौते की औपचारिक घोषणा के लिए कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

भारत की नजर प्रतिस्पर्धी देशों की स्थिति पर

व्यापार समझौते में भारत के लिए अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। संदर्भित बातचीत के अनुसार, भारत चाहता है कि समझौते के बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उचित अवसर मिले। इसी संदर्भ में आसियान देशों, चीन और बांग्लादेश जैसे बाजारों की स्थिति भी बातचीत में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे पहले भी भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। 2026 में जारी अंतरिम समझौते की रूपरेखा ने बातचीत को आगे बढ़ाने का आधार दिया, लेकिन दोनों देशों के बीच अंतिम व्यवस्था को लेकर चर्चा अभी जारी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के ताजा बयान से भी स्पष्ट है कि समझौते पर काम चल रहा है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।