पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद सिर्फ तृणमूल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरे INDIA गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान को लेकर वाम दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य एम.ए. बेबी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के नेता की भूमिका विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने की होनी चाहिए।
एम.ए. बेबी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी विपक्षी नेता का काम केंद्र सरकार या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को मजबूत करने वाला बयान देना नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान ने INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।
राहुल गांधी के बयान से कैसे शुरू हुआ विवाद?पूरा मामला 8 जून को आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक से जुड़ा हुआ है। हाल ही में बैठक की अंदरूनी चर्चाओं की जानकारी सामने आने के बाद यह विवाद शुरू हुआ। बैठक में राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के बीच मतभेदों और गठबंधन की स्थिति पर अपनी राय रखी थी।
राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दलों के बीच मतभेद होना कोई नई बात नहीं है और इसे भाजपा द्वारा विपक्ष की कमजोरी के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने गठबंधन की मजबूती का उदाहरण देते हुए तमिलनाडु की डीएमके का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही केरल की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उनकी वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई जारी है।
उन्होंने कहा कि उनसे यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को नजरअंदाज कर हर नेता से सार्वजनिक रूप से नजदीकी दिखाएं। राहुल का कहना था कि विपक्ष को व्यावहारिक राजनीति भी करनी होगी और साथ ही भाजपा के उस नैरेटिव का मुकाबला भी करना होगा, जिसमें विपक्ष को बिखरा हुआ दिखाने की कोशिश की जाती है।
सीपीआई(एम) ने किया तीखा पलटवारराहुल गांधी के बयान के सार्वजनिक होने के बाद सीपीआई(एम) नेतृत्व ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। एम.ए. बेबी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी ने भी राहुल गांधी से पिनाराई विजयन को गले लगाने की मांग नहीं की है।
उन्होंने लिखा कि वामपंथी दलों की आपत्ति किसी व्यक्तिगत रिश्ते को लेकर नहीं है, बल्कि इस बात को लेकर है कि कांग्रेस नेतृत्व लगातार ऐसे बयान देता रहा है, जिनसे विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को नैतिक समर्थन मिलता दिखाई देता है। बेबी ने कहा कि विपक्ष के नेता को ऐसी भूमिका से बचना चाहिए जो अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार को राजनीतिक लाभ पहुंचाए।
उनका यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई और INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे।
केरल की राजनीति को लेकर पुराना विवाददरअसल कांग्रेस और सीपीआई(एम) के बीच यह टकराव नया नहीं है। केरल की राजनीति में दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद राज्य स्तर पर दोनों के बीच कड़ा राजनीतिक मुकाबला जारी रहता है।
सूत्रों के मुताबिक INDIA गठबंधन की बैठक से पहले भी एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए उन आरोपों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिनमें सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच कथित सांठगांठ की बात कही गई थी।
वाम दलों का मानना है कि इस तरह के आरोप गठबंधन की भावना को कमजोर करते हैं और विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचाते हैं।
केंद्रीय एजेंसियों के मुद्दे पर भी मतभेदसीपीआई(एम) की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों से जांच और कार्रवाई की मांग की थी। वामपंथी दलों का कहना है कि जब विपक्ष लगातार केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता है, तब सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ ऐसी मांग करना विरोधाभासी संदेश देता है।
इसी मुद्दे को लेकर वाम नेतृत्व लगातार कांग्रेस से जवाब मांगता रहा है। उनका कहना है कि गठबंधन में शामिल दलों को एक-दूसरे के खिलाफ ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए, जो भाजपा को राजनीतिक बढ़त दिला सकते हैं।
INDIA गठबंधन के भीतर बढ़ी असहजताजानकारों का मानना है कि हालिया विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एकजुट दिखने वाले विपक्षी दलों के बीच कई राज्यों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब भी बनी हुई है। खासकर केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस और वाम दलों के बीच की प्रतिद्वंद्विता गठबंधन की राजनीति पर असर डालती रही है।
सूत्रों के अनुसार INDIA गठबंधन की बैठक के दौरान भी सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि वाम दल कांग्रेस के रुख से संतुष्ट नहीं हैं और चाहते हैं कि गठबंधन के भीतर आपसी आरोप-प्रत्यारोप पर स्पष्ट नीति बनाई जाए।
फिलहाल राहुल गांधी के बयान और उस पर सीपीआई(एम) की प्रतिक्रिया ने विपक्षी गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस और वाम दल इन मतभेदों को कैसे सुलझाते हैं और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच INDIA गठबंधन अपनी एकजुटता को किस तरह बनाए रखता है।