ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की मांग पर कांग्रेस का तंज, पवन खेड़ा बोले- ‘प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को लेकर ज्ञानेश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें पद्म भूषण देने की मांग की। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पद्म भूषण तो बहुत छोटी बात है, उन्हें देश का प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए।

शमिक भट्टाचार्य का यह बयान ऐसे समय आया है, जब SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर रिकॉर्ड पर कई आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई।

हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी हासिल थी। आयोग ने यह भी कहा कि अलग-अलग विचार निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

शमिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के लिए क्या कहा

पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराने और मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए उन्हें कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए। उनकी ओर से यह भी दावा किया गया कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रही।

भट्टाचार्य ने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल में लंबे समय बाद बिना चुनावी हिंसा, भय या हत्या के लोगों को मतदान का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता मुख्य चुनाव आयुक्त के काम के लिए उनका आभार व्यक्त कर रही है। शमिक भट्टाचार्य की ओर से ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की मांग की पुष्टि हालिया रिपोर्टों में भी हुई है।

पवन खेड़ा ने किस अंदाज में दिया जवाब

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने BJP नेता के बयान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण बहुत छोटी बात है और उन्हें देश का प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए।

खेड़ा ने कहा, “पद्म भूषण तो बहुत छोटी बात है, उन्हें तो देश का प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए। आखिर जो व्यक्ति दूसरों को प्रधानमंत्री बना सकता है वह खुद भी तो प्रधानमंत्री बनने का हकदार है।”

यह टिप्पणी चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस की ओर से जारी आलोचना के बीच सामने आई है। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से सवाल कर रहे हैं।
SIR को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल

SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस के संचालन से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन आपत्तियों में Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच और पश्चिम बंगाल में कुछ अपीलों को लेकर सवाल शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई थी। इसके अलावा, गोवा में SIR से जुड़े एक मामले में 97 ऐसे मतदाताओं का भी उल्लेख किया गया, जिन्हें स्थानीय अधिकारियों ने दस्तावेजों के आधार पर पात्र पाया था, लेकिन सॉफ्टवेयर में उन्हें दोबारा शामिल करने का विकल्प समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर भी मामला चर्चा में रहा है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22.21 लाख ने अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की है। कुल 38.31 लाख अपीलें लंबित होने की जानकारी भी आयोग ने अदालत को दी थी।

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा


दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने रिपोर्ट में बताए गए 14 नोट्स के अस्तित्व को खारिज नहीं किया, लेकिन उन्हें सुझाव के रूप में बताया और कहा कि पिछले एक साल में लिए गए फैसलों में तीनों आयुक्तों की सहमति थी।

इस बीच, ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। BJP की ओर से जहां पश्चिम बंगाल में उनके काम की प्रशंसा की जा रही है, वहीं कांग्रेस SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठा रही है। इसी राजनीतिक टकराव के बीच शमिक भट्टाचार्य की पद्म भूषण वाली टिप्पणी और पवन खेड़ा का प्रधानमंत्री बनाने वाला तंज चर्चा में आया है।