मंगलवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स में गिरावट देखने को मिली, जबकि चांदी की कीमत में एक प्रतिशत से अधिक की बड़ी टूट दर्ज हुई। निवेशकों के बीच वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता का असर कीमती धातुओं के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
आज सुबह कारोबार के दौरान एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.24 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,58,699 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता नजर आया। वहीं, सिल्वर फ्यूचर्स में दबाव और ज्यादा दिखाई दिया। एमसीएक्स पर चांदी का भाव 1.22 फीसदी तक टूटकर 73,349 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं में गिरावट का माहौल बना रहा। ग्लोबल मार्केट में सिल्वर की कीमत करीब 1.8 फीसदी फिसलकर 36.66 डॉलर प्रति आउंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि स्पॉट गोल्ड लगभग 0.7 फीसदी गिरकर 3,537.54 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच गया।
आखिर क्यों टूट रहे हैं सोने और चांदी के दाम?कमोडिटी बाजार पर इस समय कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर एक साथ देखने को मिल रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई थी, लेकिन मंगलवार को हालात फिर बदल गए। अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा हमले की खबर सामने आने के बाद क्रूड ऑयल में तेजी लौट आई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 फीसदी उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी देखने को मिली है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने और चांदी जैसी धातुओं पर दबाव बढ़ जाता है। बढ़ती वैश्विक महंगाई और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, जिसका असर बुलियन मार्केट पर दिखाई दे रहा है।
महंगाई और वैश्विक तनाव ने बढ़ाई चिंतादुनिया के कई देशों में इस समय महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। भारत समेत कई अर्थव्यवस्थाएं इसका असर झेल रही हैं। हालांकि पारंपरिक रूप से सोने को महंगाई के खिलाफ सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का रुख अस्थिर नजर आ रहा है। यही वजह है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा। ऐसे में निवेशकों की रणनीति तेजी से बदल सकती है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव पर टिकी दुनिया की नजरफिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार की सबसे बड़ी चिंता ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर दुनिया भर के निवेशक नजर बनाए हुए हैं। हालांकि अमेरिका के विदेश मंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बातचीत की प्रक्रिया आसान नहीं रहने वाली। इसी बीच ईरान पर अमेरिका के ताजा हमले ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल होगा। यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो दुनिया भर में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इसका असर केवल आम उपभोक्ताओं पर ही नहीं बल्कि गोल्ड और सिल्वर जैसे निवेश बाजारों पर भी देखने को मिलेगा।
एक्सपर्ट्स की राय क्या है?मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक फिलहाल सोना 1,57,500 रुपये के आसपास मजबूत सपोर्ट लेता दिखाई दे रहा है। वहीं, 1,60,000 रुपये का स्तर बाजार के लिए बड़ा रेसिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि यदि गोल्ड इस स्तर को मजबूती से पार कर लेता है तो आने वाले समय में इसकी कीमत 1,63,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। वहीं, कमजोर वैश्विक संकेत बने रहने की स्थिति में बाजार में दबाव जारी रह सकता है।