दामों में बड़ी गिरावट, सोना ₹1600 से ज्यादा टूटा तो चांदी ₹6800 से अधिक लुढ़की

घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में मंगलवार (23 जून) को सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला, जिसके चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। मजबूत होते डॉलर और वैश्विक आर्थिक संकेतों के असर से सोने-चांदी की कीमतों में भारी कमजोरी आई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का अगस्त वायदा भाव 1.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,46,566 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया। वहीं चांदी की कीमतों में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर सिल्वर 2.85 प्रतिशत टूटकर 2,27,622 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एक ही दिन में सोने की कीमत में 1,616 रुपये की कमी दर्ज की गई, जबकि चांदी 6,843 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई।

आखिर क्यों कमजोर पड़ रहे हैं सोना और चांदी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमती धातुओं पर दबाव का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.08 के स्तर तक पहुंच गया है, जो पिछले एक साल का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में गिरावट आती है।

बाजार जानकारों का कहना है कि डॉलर में यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिसके चलते निवेशकों को लग रहा है कि फेड भविष्य में और सख्त रुख अपना सकता है।

हालांकि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी मुद्रा मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल डॉलर की ओर अधिक दिखाई दे रहा है और सोना-चांदी दबाव में बने हुए हैं।
ब्याज दरों को लेकर बढ़ी बाजार की उम्मीदें

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अब सभी की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अगले कदम पर टिकी हुई है। बाजार सहभागी यह आकलन कर रहे हैं कि वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े बताते हैं कि अब दिसंबर तक अमेरिकी फेड द्वारा दरों में बढ़ोतरी की संभावना करीब 88 प्रतिशत मानी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह हुई फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले यही संभावना लगभग 61 प्रतिशत आंकी जा रही थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिका के पीसीई (PCE) मुद्रास्फीति आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह आंकड़ा फेडरल रिजर्व का पसंदीदा महंगाई संकेतक माना जाता है और इसी के आधार पर आगे की मौद्रिक नीति तय की जाती है।

अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों ने भी बढ़ाया दबाव

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी योगदान माना जा रहा है। स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। तकनीकी स्तर की वार्ताएं पूरे सप्ताह जारी रहने की संभावना है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान ने लेबनान में जारी तनाव और हिंसा से निपटने के लिए एक संयुक्त डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाने पर भी सहमति जताई है।

इसके अलावा अमेरिका ने ईरान पर लंबे समय से लागू कुछ प्रतिबंधों में ढील देते हुए ईरानी तेल की बिक्री को मंजूरी दी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग पर असर पड़ा है।

निवेशकों के लिए क्या है बाजार की सलाह?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी का असर घरेलू वायदा बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

उनका अनुमान है कि एमसीएक्स पर सोने का अगस्त वायदा भाव आने वाले सत्रों में 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकता है। उन्होंने अल्पकालिक कारोबारियों को सतर्क रहने और इंट्राडे ट्रेडिंग में बिकवाली की रणनीति अपनाने की सलाह दी है। त्रिवेदी के मुताबिक 1,48,600 रुपये का स्तर फिलहाल सोने के लिए मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।