सोना 3 दिन में 7500 रुपये टूटा, चांदी में 11,300 रुपये की बड़ी गिरावट, जानिए ताजा भाव और वजहें

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में भारी बिकवाली देखने को मिली। एमसीएक्स गोल्ड का भाव 1,478 रुपये की गिरावट के साथ 1,40,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। अगर पिछले तीन कारोबारी सत्रों की बात करें तो सोना कुल 7,482 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट चुका है।

वहीं चांदी में भी बड़ी कमजोरी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी का भाव गिरकर 2,10,737 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। पिछले बंद भाव की तुलना में इसमें 11,298 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। बीते तीन दिनों में चांदी की कीमत में कुल 21,728 रुपये प्रति किलो की कमी आ चुकी है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे पहुंचे सोना और चांदी

एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी को सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था। लेकिन उसके बाद से कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। मौजूदा स्तर पर सोना अपने रिकॉर्ड हाई से 52,396 रुपये तक नीचे आ चुका है।

चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। एमसीएक्स सिल्वर ने 4,20,048 रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। वर्तमान कीमतों को देखें तो चांदी उस स्तर से 2,09,311 रुपये सस्ती हो चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो अपने उच्चतम स्तर की तुलना में चांदी की कीमत लगभग आधी रह गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका में ब्याज दरें और बढ़ने की आशंका तथा डॉलर की मजबूती ने सोने की लगभग तीन साल पुरानी तेजी पर विराम लगा दिया है।

वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतें दबाव में हैं। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 3.8 प्रतिशत तक फिसल गया और इसकी कीमत 3,960 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे पहुंच गई। दूसरी ओर चांदी भी कमजोर रही और दिसंबर के बाद पहली बार इसका भाव 60 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया।

आखिर क्यों टूट रहे हैं सोने के दाम? जानिए 5 बड़े कारण
1. डॉलर की मजबूती


इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। चूंकि सोना और चांदी की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और कीमतों में गिरावट आती है।

2. फेड की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीद

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से महंगाई को नियंत्रित करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। बाजार को उम्मीद है कि ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। ऐसे माहौल में डॉलर को समर्थन मिलता है, जबकि सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की मांग घटती है।

3. भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती महंगाई

विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ाया है। इससे निवेशकों को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती की बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऐसे में ट्रेजरी बॉन्ड जैसी यील्ड देने वाली संपत्तियां निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लग रही हैं और सोना दबाव में है।

4. बड़े वित्तीय संस्थानों ने घटाए अनुमान

दुनिया की प्रमुख निवेश संस्थाओं ने भी सोने को लेकर अपने अनुमान कम किए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने अपने पूर्वानुमान में 500 डॉलर प्रति औंस की कटौती की है और अब साल के अंत तक सोने का भाव 4,900 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। वहीं डॉयचे बैंक ने चौथी तिमाही के लिए अपने मूल्य लक्ष्य में करीब 17 प्रतिशत की कमी कर दी है।

5. गोल्ड ईटीएफ से लगातार निकासी

सोने पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) से लगातार हो रही निकासी है। निवेशक इन फंडों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा चीन में सोने की मांग कमजोर पड़ने के संकेत भी मिले हैं, जो वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।

तीन साल की शानदार रैली के बाद आया करेक्शन

पिछले तीन वर्षों के दौरान सोने ने निवेशकों को लगातार दोहरे अंकों का रिटर्न दिया था। इस अवधि में इसकी कीमत दोगुने से भी अधिक बढ़ गई थी और इसे सुरक्षित निवेश का सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा था।

हालांकि जनवरी के आखिर में तेजी का यह सिलसिला थम गया, जब सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था। इसके बाद मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में गिरावट शुरू हुई। जून तक सोना अपने उच्चतम स्तर से 20 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है, जबकि चांदी में भी तेज करेक्शन देखने को मिला है।