क्या सच में पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाया जा रहा है? E20 पेट्रोल को लेकर फैली 20 बड़ी गलतफहमियों की पूरी सच्चाई

देशभर के पेट्रोल पंपों पर जब तक E10 यानी 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध था, तब तक इसे लेकर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। लेकिन E20 पेट्रोल के आने के बाद इस पर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रहा है और आम लोगों के मन में भी कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई हैं।

कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का जूस मिलाकर बेचा जा रहा है, जबकि कहीं यह कहा जा रहा है कि एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है। इसके अलावा माइलेज, इंजन, वारंटी और कीमत को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। आइए जानते हैं E20 पेट्रोल से जुड़े ऐसे ही प्रमुख सवालों के जवाब।

1. आखिर E20 पेट्रोल क्या होता है?

E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की शुरुआत वर्ष 2022 में E10 के रूप में हुई थी, जिसमें 10 प्रतिशत इथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल होता था। इसके बाद दिसंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू की गई।

2. क्या E20 से माइलेज 30 प्रतिशत तक घट जाता है?

यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार E20 के उपयोग से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन 30 प्रतिशत तक गिरावट का दावा तथ्यात्मक नहीं माना जाता। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया था कि E20 के कारण माइलेज में मामूली अंतर संभव है, हालांकि वाहन की एक्सीलरेशन बेहतर हो सकती है। इसके अलावा माइलेज ड्राइविंग स्टाइल, टायर प्रेशर, वाहन की सर्विसिंग और सड़क की स्थिति जैसे कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

3. क्या E20 से इंजन खराब होने लगता है?

इस तरह के दावों की पुष्टि अब तक नहीं हुई है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से जारी फैक्टशीट के मुताबिक E20 लागू होने के बाद इंजन खराब होने का कोई व्यापक या असामान्य पैटर्न सामने नहीं आया। E20 को लागू करने से पहले सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए थे, जिनके बाद ही इसे मंजूरी दी गई।

4. क्या E20 से गाड़ी की परफॉर्मेंस कमजोर हो जाती है?

PIB के अनुसार इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है। इथेनॉल को हाई ऑक्टेन ईंधन माना जाता है, जिसका रिसर्च ऑक्टेन नंबर लगभग 108.5 है, जबकि सामान्य पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर करीब 84.4 होता है। E20 मिश्रण से ईंधन का ऑक्टेन स्तर लगभग 95 तक पहुंच सकता है, जिससे इंजन में बेहतर दहन होता है। इसका फायदा बेहतर एक्सीलरेशन और अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन के रूप में मिलता है।

5. क्या E20 इस्तेमाल करने पर इंश्योरेंस या वारंटी खत्म हो जाती है?

यह भी एक आम भ्रम है। बीमा कंपनियों और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े संगठनों ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहन की वारंटी या बीमा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। SIAM के अनुसार E20 के लिए उपयुक्त वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहती है।

6. जब इथेनॉल मिलाया जा रहा है तो E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ?


शुरुआती दौर में यह उम्मीद जताई गई थी कि E20 पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम हो सकती है। हालांकि वर्तमान में ऐसा नहीं हो रहा है। PIB की फैक्टशीट के अनुसार नीति आयोग की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट उस समय की लागत के आधार पर तैयार की गई थी, जब इथेनॉल की कीमत पेट्रोल की तुलना में कम थी। बाद के वर्षों में इथेनॉल की खरीद लागत बढ़ गई और कई मामलों में यह रिफाइंड पेट्रोल की लागत से अधिक हो गई। इसी वजह से उपभोक्ताओं को E20 पेट्रोल अपेक्षित रूप से सस्ता नहीं मिल रहा है।
7. क्या सरकार ने खुद E20 को सिर्फ 'एक्सपेरिमेंट' बताया है?

हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हुआ कि सरकार ने E20 को केवल एक प्रयोग बताया है। हालांकि, सरकार ने इस दावे को गलत बताया है। PIB के अनुसार अदालत में जिस मामले पर चर्चा हुई, वह इथेनॉल खरीद से जुड़े अनुबंधों से संबंधित था, न कि E20 ईंधन नीति से। 30 जून को अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि E20 को महज एक्सपेरिमेंट बताने वाली बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

8. क्या पेट्रोल में सीधे गन्ने का जूस मिलाया जा रहा है?

यह सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल होने वाले दावों में से एक है। कई वीडियो में कहा गया कि पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाकर बेचा जा रहा है। सरकार ने इन दावों को भ्रामक बताया है। PIB के मुताबिक, इथेनॉल सीधे गन्ने के रस के रूप में नहीं मिलाया जाता। इसे फर्मेंटेशन और औद्योगिक प्रोसेसिंग की कई चरणों वाली प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, जिससे उसके रासायनिक गुण पूरी तरह बदल जाते हैं। ईंधन में उपयोग से पहले यह निर्धारित गुणवत्ता मानकों को भी पूरा करता है।

9. क्या एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है?

इस दावे को भी गलत बताया गया है। PIB के अनुसार एक लीटर इथेनॉल के उत्पादन में हजारों लीटर नहीं, बल्कि लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग होता है। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

10. क्या E20 के कारण फ्यूल टैंक में चींटियां या मधुमक्खियां आने लगती हैं?

सरकार का कहना है कि यह दावा भी पूरी तरह निराधार है। ईंधन में इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल की उत्पादन प्रक्रिया के दौरान उसमें मौजूद शर्करा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इसके अलावा उसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं और पेट्रोल की विशिष्ट गंध भी बनी रहती है। यही वजह है कि E20 सामान्य पेट्रोल की तरह ही व्यवहार करता है और इससे चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

11. क्या E20 फ्यूल टैंक को नुकसान पहुंचाता है?

PIB के मुताबिक आधुनिक वाहनों के फ्यूल सिस्टम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उनमें पानी प्रवेश न कर सके। यही तकनीक E20 उपयोग करने वाले वाहनों पर भी लागू होती है। इसलिए केवल इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल करने से फ्यूल टैंक खराब होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

12. क्या पुरानी गाड़ियों में E20 से दिक्कत आती है?

मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉर्पोरेट अफेयर्स) राहुल भारती के अनुसार E10 के लिए बनी गाड़ियों पर भी E20 का परीक्षण किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने करीब 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की, जिनमें 1.5 करोड़ से अधिक वाहन तीन वर्ष से ज्यादा पुराने थे और E20 प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद E20 के कारण किसी बड़े तकनीकी दोष का पैटर्न सामने नहीं आया।

13. फिर माइलेज कम होने की शिकायत क्यों आती है?

राहुल भारती के अनुसार माइलेज में थोड़ा अंतर संभव है, लेकिन यह उतना बड़ा नहीं होता जितना सोशल मीडिया पर बताया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन एक लीटर पेट्रोल में 20 किलोमीटर चलता है, तो E20 इस्तेमाल करने पर उसकी दूरी लगभग 0.6 किलोमीटर तक कम हो सकती है। यानी गिरावट सीमित होती है।

14. आखिर E20 लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला के मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम विभिन्न विशेषज्ञों और हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया। उन्होंने बताया कि E20 भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।

15. क्या दूसरे देशों में भी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिलता है?

हाँ। PIB के अनुसार दुनिया के कई देशों में वर्षों से इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका में E10 आम है और E15 का उपयोग भी बढ़ रहा है। वहां E85 तक चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भी उपलब्ध हैं। ब्राजील में E27 मिश्रण इस्तेमाल होता है, जबकि जापान ने E10 को अपनाया है। इसके अलावा कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में भी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध है।

16. भारत को इथेनॉल मिश्रण की जरूरत क्यों महसूस हुई?


भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88.5 प्रतिशत आयात करता है। आयात पर इतनी अधिक निर्भरता देश के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाती है। इसी कारण पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देकर विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाया गया।

17. क्या इससे कच्चे तेल का आयात वास्तव में घटा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च में कहा था कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से भारत को लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का आयात कम करना पड़ा। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

18. देश को इससे आर्थिक फायदा कितना हुआ?

सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण भारत ने कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत की है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014-15 से अब तक विदेशी मुद्रा के रूप में 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।

19. अगर कोई उपभोक्ता E20 नहीं लेना चाहता तो क्या विकल्प है?


वर्तमान में देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है। CarDekho की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ऑयल का XP95, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power95 और भारत पेट्रोलियम का Speed97 जैसे प्रीमियम ईंधनों में भी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण किया जा रहा है। हालांकि इंडियन ऑयल का XP100 अभी भी इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल के रूप में उपलब्ध है।

20. इथेनॉल-फ्री XP100 पेट्रोल की कीमत कितनी है?

जो लोग बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल चाहते हैं, वे इंडियन ऑयल के चुनिंदा पेट्रोल पंपों से XP100 खरीद सकते हैं। दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल 167.35 रुपये प्रति लीटर है, जो सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक है।