नक्सलियों को अमित शाह का संदेश, आत्मसमर्पण करें, गोली नहीं चलेगी; संघर्षविराम प्रस्ताव सख्ती से खारिज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों द्वारा हाल ही में दिए गए संघर्ष विराम के प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया। उन्होंने साफ कहा कि यदि चरमपंथी वास्तव में आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो उनके लिए रास्ते खुले हैं, लेकिन संघर्ष विराम का सवाल ही नहीं उठता। शाह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप हथियार डाल देंगे तो आपको एक भी गोली का सामना नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षा बल आपका स्वागत करेंगे, लेकिन युद्धविराम का कोई औचित्य नहीं है।” गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वालों के लिए सरकार की पुनर्वास नीति बेहद लाभकारी होगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हरसंभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह बात ‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के समापन अवसर पर कही।

वामपंथी दलों पर सीधा हमला


अमित शाह ने अपने संबोधन में वामपंथी राजनीतिक दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने हमेशा माओवादी हिंसा को वैचारिक समर्थन देकर देश को गुमराह किया है। यह तर्क देना कि केवल विकास की कमी के कारण नक्सलवाद फैला, सरासर गलत है। शाह ने जोर देकर कहा कि असल में “लाल आतंक” ही वह वजह है, जिसने दशकों तक भारत के कई हिस्सों में प्रगति को रोक दिया।

‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के बाद आई पेशकश

भाकपा (माओवादी) ने यह संघर्ष विराम प्रस्ताव उस समय दिया था, जब सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर कई शीर्ष नक्सलियों को ढेर कर दिया था। इसे “ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट” नाम दिया गया। शाह ने इस संदर्भ में कहा कि सिर्फ नक्सली हिंसा को रोकना ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि नक्सलवाद की जड़ें समाज में गहराई तक वैचारिक आधार पर फैलाई गई हैं।

वैचारिक पोषण करने वालों की पहचान जरूरी

अमित शाह ने कहा, “हमें सोचना होगा कि आखिर नक्सलवाद पनपा कैसे? इसे वैचारिक, कानूनी और आर्थिक मदद किसने दी? जब तक समाज ऐसे लोगों को पहचानकर अलग नहीं करेगा, तब तक यह लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं होगी।” उन्होंने आगाह किया कि आज भी कई लोग इस विचारधारा को पोषित कर रहे हैं, जिन्हें सामने लाना और रोकना बेहद आवश्यक है।

2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प

गृह मंत्री ने अंत में यह आश्वासन भी दिया कि केंद्र सरकार ठोस रणनीति पर काम कर रही है और 31 मार्च 2026 तक देश पूरी तरह नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो जाएगा। शाह ने कहा कि इस दिशा में सुरक्षा बल और सरकार एक साथ मिलकर निर्णायक मोर्चा ले रहे हैं।