‘सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है’, ईरान संकट और गैस सप्लाई को लेकर सचिन पायलट का केंद्र पर निशाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Sachin Pilot ने ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव, गैस सिलेंडरों की सप्लाई में कथित कमी और संभावित तेल संकट को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को उन्होंने कहा कि इस पूरे मुद्दे पर सरकार का रवैया और चुप्पी कई तरह की शंकाएं पैदा करती है। उनके मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि देश के सामने पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं रखी जा रही है।

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ रहा असर


विधानसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे हालात में सरकार को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी ताकि देश में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी तो कर दी, लेकिन पर्याप्त मात्रा में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उतना ध्यान नहीं दिया। पायलट के अनुसार इसका असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट जैसे कारोबार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

पायलट ने यह भी आशंका जताई कि अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह तनावपूर्ण बनी रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को दूरदर्शिता के साथ कदम उठाने चाहिए और वैकल्पिक संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े हालात पर संसद में सरकार द्वारा दिया गया बयान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सरकार को शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए सक्रिय कूटनीतिक पहल करनी चाहिए। पायलट का कहना था कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं हो सकता, बल्कि संवाद और बातचीत ही इसका सही रास्ता है।
संसद में चर्चा की उठाई मांग

पायलट ने एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर संसद में विस्तृत चर्चा न होने को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

उनके मुताबिक इस मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि अगर सरकार इस विषय पर बहस से बच रही है, तो इससे यह संदेश जाता है कि कुछ तथ्यों को सामने आने से रोका जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष यह जानना चाहता है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है।