अमित शाह का नशा तस्करों पर बड़ा प्रहार, 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' में 18 गिरफ्तार, 17.82 करोड़ की संपत्ति जब्त

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी है। 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के दौरान 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला, जबकि 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया। इसके अलावा 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई और 500 डेटोनेटर तथा 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस अभियान की जानकारी साझा की। उन्होंने इस कार्रवाई में शामिल केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर के पुलिसकर्मियों की टीम को बधाई दी। गृह मंत्री के मुताबिक, इस संयुक्त अभियान के जरिए एक अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है, जो भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार तस्करी में शामिल था।

'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' के जरिए होती थी नशीले पदार्थों की तस्करी

अमित शाह ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाला यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' के माध्यम से सक्रिय था। इस नेटवर्क का संचालन भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ा था। इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में एक साथ अभियान चलाया।

गृह मंत्री के अनुसार, 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में कुल 38 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता लगना भी एक अहम पहलू रहा। इसके साथ ही जांच और कार्रवाई के दौरान 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया तथा 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।

छापेमारी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए। इन बरामदगियों और वित्तीय कार्रवाई का ब्योरा साझा करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र सरकार नशीले पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी रखेगी।
31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य

अमित शाह ने 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' को केंद्र सरकार के उस संकल्प से जोड़कर बताया, जिसके तहत 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उनका पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता।

गृह मंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा, हमारी एजेंसियों ने 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 जगहों पर एक साथ छापेमारी की और नशीले पदार्थों के एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को ध्वस्त कर दिया।

उन्होंने अभियान के परिणामों का जिक्र करते हुए बताया, इस ऑपरेशन में 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला, 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। शाह ने कहा कि भारत नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नार्को-कार्टेल के खिलाफ तब तक प्रहार करता रहेगा, जब तक इन गिरोहों का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई देश को नशा मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नशीले पदार्थों को देश की बड़ी चुनौतियों में से एक मानते हैं अमित शाह

अमित शाह पहले भी नशीले पदार्थों को भारत के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यदि इस खतरे को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह देश की तरक्की को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने दिसंबर 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

21 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित नेशनल पुलिस मेमोरियल से दिए गए अपने संदेश में शाह ने देशभर के पुलिस बलों से इस अभियान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहने की अपील की थी। उन्होंने नशीले पदार्थों के खतरे को जड़ से खत्म करने और भारत को नशा मुक्त बनाने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया था।

उनका संदेश देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने की केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप था। 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में की गई कार्रवाई भी इसी व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है।

पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों की भूमिका का भी किया जिक्र

गृह मंत्री ने अपने पहले के संबोधन में भारत के विकास और आंतरिक सुरक्षा में पुलिस बलों तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि इन बलों ने नक्सलवाद से निपटने के साथ-साथ नशीले पदार्थों के खिलाफ देश की लड़ाई में भी अहम योगदान दिया है।

पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर 21 अक्टूबर को दिए गए संदेश में शाह ने देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को याद किया था। उन्होंने कहा था, ये अमर नायक अपने इस संकल्प पर अडिग रहे कि देश की जमीन का एक इंच भी हिस्सा विदेशी हाथों में नहीं जाना चाहिए, और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। तब से, हर साल 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने आगे कहा था, कोई सोच भी नहीं सकता कि अगर इन जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तो आज हम कहाँ खड़े होते।

शाह के इस संदेश में देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में शहीद जवानों के योगदान को रेखांकित किया गया था। उन्होंने पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका को देश की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया था।