RSS में महिलाओं की भूमिका पर अखिलेश का सवाल, बांसुरी स्वराज ने दिया करारा जवाब

महिला आरक्षण को लेकर संसद में जारी विशेष सत्र के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी दौरान Akhilesh Yadav ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में महिलाओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तंज कसा। उन्होंने पूछा कि आखिर संघ परिवार में महिलाओं की भागीदारी कहां दिखाई देती है और उन्हें संगठन में कितना स्थान दिया गया है। उनके इस सवाल का तुरंत जवाब तो नहीं मिला, लेकिन कुछ वक्ताओं के बाद अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुईं Bansuri Swaraj ने इस पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी।

बांसुरी स्वराज ने अखिलेश यादव के बयान का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें “विचार परिवार” की संरचना को समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह स्वयं राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी रही हैं, जो पिछले लगभग 90 वर्षों से आरएसएस के समानांतर कार्य कर रही है। उनके मुताबिक, यह संगठन महिलाओं को समाज और राष्ट्र सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देता है और इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।

अपने संबोधन में उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर भी विपक्ष की चिंताओं को खारिज किया। बांसुरी ने कहा कि परिसीमन कोई अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में एक जरूरी प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्गठित किए, आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करना संभव नहीं होगा। इसलिए यह कदम आवश्यक और व्यावहारिक है।
सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर उठे सवालों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। बांसुरी स्वराज ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की संख्या सीमित है, लेकिन प्रस्तावित बदलावों के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब लोकसभा की 543 सीटें तय की गई थीं, उस समय देश की आबादी लगभग 51 करोड़ थी, जबकि अब यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में जनसंख्या के अनुरूप सीटों का पुनर्निर्धारण जरूरी हो जाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाला परिसीमन किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और यह प्रक्रिया संतुलित रहेगी।

बांसुरी स्वराज ने अपने भाषण के दौरान यह भी कहा कि देश की महिलाएं अब पूरी तरह जागरूक हैं और वे राजनीतिक दलों के रुख पर नजर रख रही हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो दल महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े होंगे, उन्हें आने वाले समय में राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण का प्रभाव 2029 के आम चुनाव से देखने को मिलेगा, जिसके लिए मौजूदा विधेयकों में प्रावधान किया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने की योजना है, जिसके लिए परिसीमन जरूरी होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी राज्य का आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम न हो। सरकार ने इस दिशा में संतुलन बनाए रखने का भरोसा भी दिया है, जिससे सभी राज्यों और वर्गों को समान अवसर मिल सके।