बेहतर सोशल स्किल्स से बनते हैं अच्छे रिश्ते, बच्चों को जरूर सिखाए ये 7 आदतें

आपने कई लोगों को देखा होगा जिनसे सभी बात करना पसंद करते हैं क्योंकि उनकी सोशल स्किल्स अर्थात उनका व्यवहार दूसरों के प्रति अच्छा होता हैं। जीवन में सबसे बड़ा धन आपके व्यवहार को ही माना जाता हैं जो आपके व्यक्तित्व की पहचान कराता हैं। इंसान के इस व्यवहार की नींव पड़ती हैं उसके बचपन से। इसलिए जरूरी हैं कि पेरेंट्स अपने बच्चों को सोशल स्किल्स सिखाएं जो उनके व्यक्तित्व का विकास करने में उनकी मदद करें। कम उम्र में ही अगर बच्चे इस चीज को सीख जाएंगे, तो इसका फायदा उन्हें आगे चलकर भी होगा। आज इस कड़ी में हम आपको उन सोशल स्किल्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आपको अपने बच्चों को अवगत कराना चाहिए और इसकी आदत डलवानी चाहिए। तो आइये जानते हैं इनके बारे में...

एक दूसरे का सहयोग करना

बच्चों में 7 साल साल की उम्र से ही हेल्प करने और किसी भी काम में एक-दूसरे का सहयोग करने की भावना विकसित करना बहुत जरूरी होता है। ऐसा करने से बच्चे आगे चलकर न सिर्फ बेहतर रिश्ते बना सकते हैं बल्कि इससे बच्चों का व्यक्तिव भी निखर कर सामने आता है। बच्चों में इस सोशल स्किल के विकसित होने से उनके व्यक्तित्व का विकास होता है।

शेयरिंग व केयरिंग

आमतौर पर बच्चे अपनी चीजों को दूसरों से शेयर करना पसंद नहीं करते हैं। इसके साथ ही एक रिसर्च अनुसार, बच्चे खुद के पास ज्यादा चीजें होने पर उसे शेयर करते हैं। इसके अलावा वे 3 से 6 साल के बच्चे ज्यादातर थोड़े स्वार्थी होते हैं। वहीं 7 से 8 साल के बच्चे दूसरों से चीजें शेयर करने लगते हैं। ऐसे में आप अपने बच्चों के अंदर शुरु से ही शेयरिंग व केयरिंग का गुण डालें ताकि वे सभी के साथ अच्छे से रह पाएं। बच्चों को समझाएं कि दूसरों के लिए थोड़ा सा कुछ करने पर भी उन्हें अंदर से खुशी का एहसास होगा। आप उनको दूसरों की मदद करने पर कोई छोटा सा इनाम भी दे सकते हैं।

दूसरों की बात भी सुनना

बच्चों में अपनी बात कहने और लोगों से संवाद करने की क्षमता जरूर होनी चाहिए। लेकिन बच्चों में अच्छे गुण विकसित करने के लिए उन्हें दूसरों की बात सुनना भी जरूर सिखाना चाहिए। दूसरे की बात को ध्यान से सुनने के बाद अगर जरूरी हो तभी जवाब देना चाहिए। इस स्किल को सीखने से बच्चे अच्छे वक्ता बनने में सफल हो सकते हैं।


लोगों से मिलने पर उन्हें ग्रीट करना

बच्चों में अभिवादन के गुण विकसित करने से उनके व्यक्तिव का विकास होता है। इससे उनमें मौजूद संस्कार की झलक भी दिखाई देती है। इसलिए बच्चों को बचपन से ही लोगों से मिलने पर उन्हें ग्रीट करना या नमस्ते कहना जरूर सिखाना चाहिए। बच्चों में बड़ों के प्रति इज्जत और छोटों के लिए प्यार की भावना विकसित करना उनके व्यक्तित्व को प्रभावी बनाना है।

धैर्य और संयम रखना

बच्चों को धैर्य और संयम रखना सिखाने से वे दूसरे लोगों से अलग हो सकते हैं और इसकी वजह से उनमें विनम्रता भी आती है। जीवन और करियर में आगे बढ़ने के लिए भी धैर्य और संयम का रहना जरूरी है। इन स्किल को सीखने के बाद बच्चे समय की भी कद्र करेंगे और धैर्यपूर्वक हर काम को अंजाम देंगे।

अच्छी आदतें

अच्छी आदतें दिखाना भी सोशल स्किल्स का हिस्सा हैं। कब थैंक्यू बोलना है, कब सॉरी, आपको ये बस अपने बच्चे को सिखाना होगा। स्कूल के अलावा घर पर पैरेंट्स को भी बच्चे में यह स्किल डालने की कोशिश करनी चाहिए।

पर्सनल समय जरूरी

बच्चे को सिखाएं कि हर किसी में शारीरिक और इमोशनल बॉर्डर होते हैं। अक्सर बच्चे किसी के साथ इतना घुल-मिल जाते हैं कि वे सामने वाले को उनकी पर्सनल स्पेस भी नहीं देते हैं। मगर इसके कारण सामने वाला बच्चे से परेशान हो सकता है। ऐसे में आप अपने बच्चों को बचपन से ही इन बातों के बारे में समझाएं।