रात को सोते समय सबसे ज्यादा संपर्क तकिए से ही होता है। ऐसे में अगर तकिए से पसीने, नमी या पुराने कपड़े जैसी गंध आने लगे तो केवल तकिए का कवर बदलना काफी नहीं होता। तकिए के अंदर भी नमी और गंदगी जमा हो सकती है। सही सफाई और पूरी तरह सुखाने से इस तरह की बदबू को कम किया जा सकता है।
तकिए की सफाई शुरू करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह किस सामग्री से बना है और उसके कवर या लेबल पर धोने से जुड़ी क्या जानकारी दी गई है। कुछ तकिए मशीन में धोए जा सकते हैं, जबकि फोम जैसे कुछ तकियों को पानी में भिगोना उचित नहीं होता। ऐसे तकियों में सतह की सफाई और हवा में अच्छी तरह सुखाना ज्यादा जरूरी हो सकता है।
1. सबसे पहले तकिए का कवर धोएंकई बार बदबू का कारण खुद तकिया नहीं बल्कि उसका कवर होता है। सोते समय शरीर से निकलने वाला पसीना, त्वचा का तेल और धूल कवर में जमा होते रहते हैं। इसलिए कवर को नियमित रूप से धोना जरूरी है।
अगर कवर मशीन में धोने योग्य है तो उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार धोएं। धूल और एलर्जी से बचाव के लिए बिस्तर की चादर, तकिए के कवर और दूसरे बिस्तर के कपड़ों की नियमित सफाई की सलाह दी जाती है।
2. तकिए की सतह पर बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैंअगर तकिया धोने योग्य नहीं है और उसमें हल्की बदबू आ रही है तो उसकी सतह पर थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा छिड़ककर कुछ समय के लिए छोड़ सकते हैं। इसके बाद वैक्यूम क्लीनर से बेकिंग सोडा और सतह पर जमा धूल को अच्छी तरह हटा दें।
घरेलू सफाई संबंधी एक निर्माता गाइड में भी तकिए की सतह पर बेकिंग सोडा डालकर कुछ समय बाद वैक्यूम करने को गंध कम करने के एक तरीके के रूप में बताया गया है।
3. तकिए को पूरी तरह सुखाना सबसे जरूरी हैतकिए में बदबू आने की एक वजह नमी भी हो सकती है। अगर धोने के बाद तकिया अंदर से गीला रह जाता है तो उसमें सीलन जैसी गंध पैदा हो सकती है। इसलिए तकिए को धोने के बाद तब तक न इस्तेमाल करें, जब तक वह अंदर तक पूरी तरह सूख न जाए।
सफाई संबंधी विशेषज्ञ सलाह में भी तकिए को पूरी तरह सुखाने पर जोर दिया गया है, क्योंकि अंदर बची नमी से फफूंद जैसी समस्या पैदा हो सकती है।
4. धूप और खुली हवा का सहारा लेंअगर तकिए की सामग्री और उसके निर्माता के निर्देश इसकी अनुमति देते हैं, तो उसे अच्छी तरह हवा लगने वाली जगह पर सुखाया जा सकता है। हल्की गंध वाले तकिए को कुछ समय खुली हवा में रखने से भी ताजगी महसूस हो सकती है।
हालांकि तकिए को बहुत देर तक तेज धूप में रखने से पहले उसकी सामग्री और देखभाल संबंधी निर्देश देख लेना बेहतर है। हर तरह के फोम, फाइबर या दूसरे भराव के लिए एक जैसा तरीका सही नहीं होता।
5. मशीन में धोने योग्य तकिए को सही तरीके से धोएंअगर तकिया मशीन में धोने योग्य है तो उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही पानी का तापमान और धुलाई का तरीका चुनें। बहुत ज्यादा डिटर्जेंट डालने की जरूरत नहीं होती। धोने के बाद तकिए में साबुन या पानी बचा न रह जाए, इसका ध्यान रखें।
उपभोक्ता मार्गदर्शन के अनुसार पॉलिएस्टर जैसे कुछ तकियों को हल्के चक्र में धोया जा सकता है, जबकि कुछ फोम वाले तकियों को मशीन में डालना उचित नहीं होता। इसलिए सामग्री की जानकारी देखना सबसे जरूरी कदम है।
6. बदबू के साथ सीलन या फफूंद दिखे तो सावधान रहेंअगर तकिए से सिर्फ हल्की बदबू नहीं बल्कि लगातार सीलन की गंध आ रही है और उस पर फफूंद के निशान भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे केवल खुशबूदार स्प्रे से ढकने की कोशिश न करें।
पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के अनुसार फफूंद नमी वाली और सोखने वाली चीजों के अंदर तक पहुंच सकती है और कुछ छिद्रयुक्त सामग्री से इसे पूरी तरह हटाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में संक्रमित सामग्री को हटाना या बदलना पड़ सकता है।
7. तकिए पर सीधे तेज रसायन डालने से बचेंहर तकिए पर ब्लीच, परफ्यूम या किसी तेज सफाई वाले रसायन का इस्तेमाल करना सही नहीं है। इससे कपड़े या अंदर के भराव को नुकसान पहुंच सकता है और बचा हुआ रसायन त्वचा के संपर्क में भी आ सकता है।
सफाई के लिए हमेशा तकिए के निर्माता के निर्देशों को प्राथमिकता दें। फफूंद की स्थिति में भी केवल रसायन का इस्तेमाल करने के बजाय नमी के स्रोत को खत्म करना और सामग्री को अच्छी तरह सुखाना महत्वपूर्ण है।
8. तकिए के ऊपर प्रोटेक्टर कवर लगाएंअगर तकिए पर बार-बार पसीने और नमी की वजह से गंध आती है तो तकिए के ऊपर एक आसानी से धोया जा सकने वाला प्रोटेक्टर कवर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे शरीर और तकिए के बीच एक अतिरिक्त परत बनती है और तकिए के अंदर पसीना, धूल और त्वचा से निकलने वाला तेल पहुंचने की मात्रा कम हो सकती है।
धूल के कणों से एलर्जी वाले लोगों के लिए भी तकिए और गद्दे पर एलर्जेन-प्रूफ कवर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
9. तकिए को सिर्फ खुशबू से ढकने की कोशिश न करेंरूम फ्रेशनर या परफ्यूम छिड़ककर तकिए की बदबू कुछ समय के लिए कम महसूस हो सकती है, लेकिन इससे बदबू की मूल वजह दूर नहीं होती। अगर समस्या पसीने, नमी, गंदगी या फफूंद की है तो उसी कारण को दूर करना जरूरी है।
खासकर अगर तकिया लगातार नम रहता है, तो कमरे में नमी कम करना और तकिए को पूरी तरह सुखाना ज्यादा जरूरी है। फफूंद नियंत्रण के लिए भी नमी को नियंत्रित करना मुख्य कदम माना जाता है।
10. सफाई के बाद भी बदबू बनी रहे तो तकिया बदलने पर विचार करेंअगर तकिया अच्छी तरह साफ और सूखने के बाद भी लगातार बदबू देता है, खासकर जब उसमें सीलन या फफूंद के स्पष्ट निशान हों, तो उसे बदलना ज्यादा उचित हो सकता है। सोखने वाली और छिद्रयुक्त सामग्री के अंदर फफूंद पहुंच जाने पर उसकी पूरी सफाई मुश्किल हो सकती है।
इसलिए तकिए की बदबू को सिर्फ एक छोटी सफाई की समस्या मानने के बजाय उसकी नमी, कवर की सफाई और तकिए की अंदरूनी स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले देखभाल लेबल के अनुसार सफाई करें और किसी भी धुलाई के बाद तकिए को पूरी तरह सूखने दें।