वैज्ञानिक भी नहीं खोल पाए भारत के इन 10 रहस्यमयी मंदिरों का राज, विदेशों से पर्यटक आते हैं देखने

भारत का इतिहास बेहद विशाल हैं जिसमें मंदिरों का भी विशेष स्थान हैं। भारत 64 करोड़ देवी-देवताओं की भूमि है, जो अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। भारत के प्राचीनतम मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं। भारत में ऐसे अनेकों मंदिर हैं जो ओपने रहस्यों के लिए दुनियाभर में लोकप्रिय हैं। इन मंदिरों को देखने के लिए देश-विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और रहस्यों को जानकर सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। भारत में वैसे तो हजारों रहस्यमय मंदिर हैं लेकिन आज इस कड़ी में हम आपको कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने रहस्यों के साथ ही भव्यता और चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं। आइये जानते हैं इन रहस्यमयी मंदिरों के बारे में...

मां कामाख्या देवी मंदिर, असम

मां कामाख्या देवी का मंदिर असम में राजधानी गुवाहाटी के नजदीक स्थित है। यह चमात्कारिक मंदिर मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में शामिल हैं। लेकिन प्राचीन मंदिर में देवी भगवती की एक भी मूर्ति नहीं है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां सती के शव को काटा था, तो कामाख्या में उनके शरीर का एक भाग गिरा था। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे थे वह जगह शक्तिपीठ कहलाती है। यहां पर कोई मूर्ति नहीं है मां सती के शरीर के अंग की पूजा की जाती है।

कामाख्या मंदिर को शक्ति-साधना का केंद्र माना जाता है। यहां पर हर किसी की कामना पूरी होती है। इस वजह से इस मंदिर का नाम कामाख्या पड़ा है। यह मंदिर तीन भागों में बंटा है। इसके पहले हिस्से में हर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। दूसरे हिस्से माता के दर्शन होते हैं। यहां पर एक पत्थर से हमेशा पानी निकलता रहता है। बताया जाता है कि इस पत्थर से महीने में एक बार खून की धारा बहती है। यह क्यों और कैसे होता है। इस बात का पता आज तक वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए।

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर, गुजरात

गुजरात में मौजूद स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर भारत के अविश्वसनीय और रहस्यमय मंदिरों में आता है। ऐसा कहा जाता है कि ये मंदिर दिन में कुछ समय के लिए पूरी तरह से गायब हो जाता है। गायब होने के बाद इस मंदिर का एक भी हिस्सा दिखाई नहीं देता। ये मंदिर गुजरात में अरब सागर और कैम्बे की खाड़ी के तट के बीच मौजूद है और हाई टाइड के दौरान ये मंदिर रोजाना पानी में डूब जाता है और हाई टाइड का स्तर नीचे जाने पर ये मंदिर फिर से ऊपर आ जाता है। ऊपर आने के बाद, फिर इस मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। प्रकृति के इस असाधारण नजारे को देखने के लिए यहां हजारों में भीड़ जमा हो जाती है।

ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कालीधार पहाड़ी के बीच माता ज्वाला देवी का प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। मान्यताओं के मुताबिक, माता सती के जीभ के प्रतीक के तौर पर ज्वालामुखी मंदिर में धरती से ज्वाला निकलती है। यह ज्वाला नौ रंग की होती है। यहां नौ रंगों की निकलने वाली ज्वालाओं को देवी शक्ति का नौ रूप माना जाता है। यह ज्वाला महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विन्ध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी की रूप है। मंदिर में निकलने वाली ज्वालाएं कहां से निकलती हैं और इनका रंग कैसे परिवर्तित होता है। आज तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। इस ज्वाला को मुस्लिम शासकों ने कई बार बुझाने की कोशिश की, लेकिन उनको सफलता नहीं मिली।

करणी माता मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के देशनोक नगर में करणी माता का मंदिर मौजूद है। ये मंदिर भी किसी रहस्यमयी मंदिर से कम नहीं है। आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर में 20,000 से अधिक चूहे है, और चूहों का झूठा भोजन बेहद पवित्र माना जाता है। भोजन को वहां प्रसाद के रूप में भी बांटा जाता है। ऐसा भी मान्यता है कि अगर एक चूहा मारा जाता है, तो उसकी जगह पर एक सोने का चूहा रखा जाता है। सबसे आश्चर्य करने वाली बात यह है कि चूहे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और मंदिर परिसर में दौड़ते रहते हैं। मंदिर में चूहों की संख्या इतनी है कि लोग पांव उठाकर नहीं चल पाते। इस मंदिर के बाहर चूहे नहीं दिखते हैं।

मेहंदीपुर बाला जी मंदिर, राजस्थान

महेंदीपुर बालाजी मंदिर भी राजस्थान में है। यह चमात्कारिक मंदिर राज्य के दौसा जिले में स्थित है। मेहंदीपुर बालाजी धाम हनुमान जी के 10 प्रमुख सिद्धपीठों में शामिल है। माना जाता है कि यहां पर भगवान हनुमान जागृत अवस्था में विराजमान हैं। बताया जाता है कि जिन लोगों के ऊपर भूत-प्रेत और बुरी आत्मा का साया होता है। वह प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान के मंदिर में आते ही लोगों के शरीर से बुरी आत्माएं और भूत-पिशाच पीड़ित व्यक्ति के शरीर से निकल जाता है। इस मंदिर में रात को रुका नहीं जा सकता है और यहां का प्रसाद भी घर नहीं लेकर जाया जा सकता है।

वीरभद्र मंदिर, आंध्र प्रदेश

वीरभद्र मंदिर भारत के सबसे रहस्यमयी मंदिरों में शामिल है। वीरभद्र मंदिर की एक रहस्यमयी बात यह है कि यहां 70 बड़े स्तम्भों में एक स्तम्भ मंदिर की छत को तो छूता है, लेकिन जमीन से उठा रहता है। इस पिलर को हैंगिंग पिलर भी कहते हैं। यहां अक्सर पर्यटक पिलर के नीचे से कपड़ा निकालते हुए इस पिलर को टेस्ट करके देखते हैं। कई पर्यटक इस पिलर के साथ फोटो भी खींचते हुए दिखाई देते हैं।

जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा

में सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक पुरी,ओडिशा - जगन्नाथ मंदिर प्रसिद्ध होने के कारण ही जबरदस्त आध्यात्मिक महत्व रखता है रथ यात्रा बल्कि मंदिर से जुड़े रहस्यमयी तथ्यों के कारण भी। भारत में इस रहस्यमयी मंदिर को विपरीत मंदिरों के नाम से भी जाना जाता है। ऊपर लगा झंडा हवा के विपरीत दिशा में फहराता है। पुजारी रोजाना झंडे को बदलने के लिए 20 फीट ऊंची चढ़ाई चढ़ते हैं क्योंकि अगर एक दिन के लिए भी अनुष्ठान नहीं होता है तो मंदिर 18 साल तक बंद रहेगा। यह केवल जगन्नाथ मंदिर में है जहां सुबह की हवा जमीन से आती है और शाम की हवा समुद्र से आती है, यह सभी वैज्ञानिक तर्कों के लिए एक विचारोत्तेजक चुनौती है। यह भी कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर कोई पक्षी नहीं मंडराता है और इस मंदिर में दिन के किसी भी समय कोई छाया नहीं होती है। एक बार जब आप मंदिर के अंदर होते हैं, तो किनारे पर होने के बावजूद आप लहरों की आवाज नहीं सुन सकते।

काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन शहर से 8 किमी दूरी पर है। परंपराओं के मुताबिक, भगवान कालभैरव को भक्त सिर्फ शराब चढ़ाते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शराब के प्याले को काल भैरव की प्रतिमा के मुख से जैसे ही लगाते हैं, तो वह एक पल में गायब हो जाता है। इस बात की भी जानकारी आज तक नहीं मिल पाई।

शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

देश में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं। उन्हीं में से एक प्रमुख है महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर। विश्वप्रसिद्ध इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थित शनिदेव की पाषाण प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है। यहां शिगणापुर शहर में भगवान शनि महाराज का खौफ इतना है कि शहर के अधिकांश घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं हैं। दरवाजों की जगह यदि लगे हैं तो केवल पर्दे। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां चोरी नहीं होती। कहा जाता है कि जो भी चोरी करता है उसे शनि महाराज सजा स्वयं दे देते हैं। इसके कई प्रत्यक्ष उदाहरण देखे गए हैं। शनि के प्रकोप से मुक्ति के लिए यहां पर विश्वभर से प्रति शनिवार लाखों लोग आते हैं।

निधिवन मंदिर, उत्तर प्रदेश

यदि आप एक उत्साही कृष्ण प्रेमी हैं, तो वृंदावन के इस मंदिर ने आपको जरूर आकर्षित किया होगा। मैं वहां कई बार गया हूं और एक अलग वाइब का अनुभव किया है। माहौल से शुरू करते हुए, क्षेत्र पेड़ों से घिरा हुआ है जो शुष्क क्षेत्र के बावजूद हरे रहते हैं। पेड़ ज्यादा ऊँचे नहीं होते हैं और एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप कर रहे हैं, इन पेड़ों के तने और जड़ें खोखली होती हैं जो अपने आप में बहुत ही अजीब है। यह क्षेत्र बकबक करने वाले बंदरों से घिरा हुआ है, हालांकि, सूर्यास्त के बाद, वे निधि वन छोड़ देते हैं जहां यह माना जाता है कि भगवान कृष्ण हर शाम अपनी गोपियों के साथ प्रेम की रास लीला करने के लिए आते हैं। हर शाम पुजारी मंदिर में कुछ प्रसाद छोड़ जाते हैं और सुबह वे बिखरे हुए मिलते हैं। निधिवन मंदिर न केवल जिज्ञासा रखता है, बल्कि भक्तों की अटूट आस्था रखता है, जो पवित्र भूमि में मिट्टी के कण-कण में भगवान कृष्ण की उपस्थिति में दृढ़ विश्वास रखते हैं।