ये हैं गुजरात के 5 प्रसिद्ध देवी मंदिर, नवरात्रि में जरूर करें दर्शन

गुजरात में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं। यहां द्वारकाधीश मंदिर से लेकर कालिका माता मंदिर तक कई शक्तिपीठ हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गुजरात अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, और यहां देवी मां के कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में भव्य उत्सव मनाया जाता है, जो भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। यदि आप देवी मां के मंदिरों के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो गुजरात के इन 5 प्रसिद्ध मंदिरों की यात्रा जरूर करें।

# अंबाजी मंदिर

अंबाजी मंदिर उत्तरी गुजरात के बनासकांठा जिले के अंबाजी कस्बे में स्थित है। यह मंदिर देवी अम्बे का शक्तिपीठ माना जाता है, जो मां दुर्गा का एक रूप हैं। इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां एक पवित्र ‘श्री यंत्र’ स्थापित है, जिस पर ‘श्री’ शब्द अंकित है और इसे ही देवी का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर अद्भुत आस्था का केंद्र है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है, और मंदिर परिसर में भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

# नर्मदा माता मंदिर

नर्मदा माता मंदिर गुजरात के भरूच शहर में डांडिया बाजार में स्थित है। यह मंदिर लगभग 150 साल पुराना है और इसे देवी नर्मदा को समर्पित किया गया है। मान्यता है कि देवी नर्मदा अपने भक्तों के सपनों को पूरा करने वाली देवी हैं। इस मंदिर में भक्त विशेष रूप से जल अभिषेक करने आते हैं और देवी से मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत पवित्र और शांतिपूर्ण है, जहां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।

# रुक्मिणी देवी मंदिर

रुक्मिणी देवी मंदिर भगवान कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है। यह मंदिर द्वारका के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की स्थापत्य कला बहुत आकर्षक है, और यहां देवी रुक्मिणी को महालक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के पास एक पवित्र कुंड भी स्थित है, जहां भक्त पूजा-अर्चना के लिए जल भरते हैं। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहां दर्शन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

# आशापुरा देवी मां मंदिर

आशापुरा देवी का मंदिर, जिसे 'माता नो माध' के नाम से भी जाना जाता है, गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है। यह प्राचीन मंदिर भुज शहर से लगभग 138 किलोमीटर की दूरी पर है। देवी आशापुरा को कई समुदायों द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि माता आशापुरा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं, इसलिए उन्हें 'आशाओं की देवी' कहा जाता है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष अनुष्ठान और आरती का आयोजन होता है, और मंदिर के आसपास एक भव्य वार्षिक मेला भी लगता है, जिसमें हजारों भक्त हिस्सा लेते हैं।

# कालिका माता मंदिर

कालिका माता मंदिर गुजरात के प्रसिद्ध पावागढ़ पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो शक्ति और विजय की देवी मानी जाती हैं। यह मंदिर तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है, और यहां विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को पहाड़ी की चढ़ाई करनी पड़ती है, जो एक कठिन लेकिन पवित्र यात्रा मानी जाती है। यहां देवी की पूजा करने से शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

गुजरात के ये देवी मंदिर आध्यात्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। नवरात्रि के दौरान यहां की यात्रा करना न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करता है।