नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि भोजन और पानी। यह हमारे शरीर का रीसेट बटन है। सोने से हमारा शरीर और दिमाग दोनों फिर से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे दिनभर की थकान दूर होती है और हम बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। लेकिन आधुनिक जीवनशैली की वजह से बहुत से लोग समय पर सो नहीं पाते या 8 घंटे की पूरी नींद नहीं ले पाते। कुछ लोग तो 8 घंटे से भी कम सोते हैं।
लेकिन क्या आपने सोचा है कि 8 घंटे से कम नींद लेने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है? आइए जानते हैं इसके प्रमुख प्रभावों के बारे में।
1. याददाश्त और सीखने की क्षमता पर असरनींद के दौरान हमारा दिमाग दिन भर की जानकारी को सहेजता है। इसे Memory Consolidation कहा जाता है। यदि नींद पूरी नहीं होती, तो नई जानकारी को याद रखना मुश्किल हो जाता है। दिमाग का हिप्पोकैम्पस (Hippocampus), जो नई यादें बनाता है, कम नींद की स्थिति में सही से काम नहीं कर पाता। इसका असर यह होता है कि पढ़ाई या नई चीजें सीखने की क्षमता कम हो जाती है।
2. ध्यान और निर्णय क्षमता में कमीनींद की कमी आपके प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) को प्रभावित करती है, जो सोचने, निर्णय लेने और योजना बनाने के लिए जिम्मेदार है। पर्याप्त नींद न मिलने पर छोटे-छोटे निर्णय लेने में दिक्कत आती है और ध्यान आसानी से भटकने लगता है। शोध बताते हैं कि 24 घंटे तक नींद न लेने के प्रभाव वैसा ही होता है जैसे आपके शरीर में 0.10% अल्कोहल की मात्रा हो, यानी बिना शराब पिए ही आप नशे जैसी स्थिति में पहुंच जाते हैं।
3. भावनाओं का असंतुलनक्या आपने देखा है कि जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते तो छोटी-छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा या उदासी महसूस होती है? इसका कारण दिमाग का Amygdala सेंटर है, जो भावनाओं को नियंत्रित करता है। नींद की कमी में यह सेंटर लगभग 60% ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे आप तनावग्रस्त, चिड़चिड़े या भावुक हो सकते हैं।
4. अल्जाइमर और डिमेंशिया का जोखिमगहरी नींद के दौरान दिमाग का Glymphatic System सक्रिय होता है, जो बीटा-एमाइलॉयड जैसे हानिकारक प्रोटीन और टॉक्सिन्स को दिमाग से बाहर निकालता है। लगातार कम नींद लेने से ये जहरीले प्रोटीन दिमाग में जमा होने लगते हैं। लंबे समय में इससे अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
5. मानसिक और शारीरिक थकाननींद की कमी से न केवल दिमाग प्रभावित होता है, बल्कि शरीर भी थका हुआ महसूस करता है। इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। लगातार कम नींद लेने वाले लोगों में मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।