अब तक माना जाता रहा है कि इंसान की बौद्धिक क्षमता हर पीढ़ी के साथ मजबूत होती जाती है। कठिन परिस्थितियां, बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मानव मस्तिष्क को और अधिक तार्किक व तेज बनाती हैं। दशकों से हुए अध्ययनों में यह साफ दिखा कि इंसानी IQ लगातार ऊपर की ओर गया है। इस प्रवृत्ति को वैज्ञानिकों ने “फ्लिन इफेक्ट” का नाम दिया। लेकिन अब यह धारणा टूटती नजर आ रही है। हालिया शोध में पहली बार ऐसी पीढ़ी की पहचान हुई है, जिसकी बौद्धिक क्षमता आगे बढ़ने के बजाय पीछे जाती दिखाई दे रही है। यह पीढ़ी है—Gen Z, जो अपने माता-पिता की तुलना में IQ के मामले में कमजोर साबित हो रही है।
अमेरिकी सीनेट में हुआ बड़ा खुलासाइस चौंकाने वाले निष्कर्ष को न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जैरेड कुनी हॉरवाथ ने अमेरिकी सीनेट की एक समिति के सामने प्रस्तुत किया। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि अत्यधिक डिजिटल निर्भरता इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बन रही है। डॉ. हॉरवाथ के मुताबिक, 1800 के दशक के बाद यह पहली बार है जब किसी पीढ़ी की मेमोरी, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, पढ़ने-लिखने, गणित और समस्या सुलझाने की योग्यता पिछली पीढ़ी से कम पाई गई है। 15 से 27 वर्ष के युवाओं वाली Gen Z अब ऐसी पहली पीढ़ी मानी जा रही है, जिनका औसत IQ स्तर उनके माता-पिता से नीचे चला गया है।
स्क्रीन कल्चर ने धीमा किया दिमागकरीब 80 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह रिपोर्ट तैयार की गई है। डॉ. हॉरवाथ का कहना है कि मानव मस्तिष्क को छोटे-छोटे वीडियो, रील्स और अधूरे वाक्यों से सीखने के लिए नहीं बनाया गया है। गहराई से पढ़ना, लंबे समय तक किसी विषय पर ध्यान देना और आमने-सामने संवाद करना ही दिमाग को मजबूत बनाता है। उनका दावा है कि 2010 के बाद से बच्चों और युवाओं की संज्ञानात्मक क्षमता में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिसका सीधा संबंध स्क्रीन पर बढ़ते समय से है।
स्कूलों में डिजिटल उपकरणों पर लग रही लगामइस खतरे को देखते हुए कई देश अब शिक्षा प्रणाली में बदलाव कर रहे हैं। स्वीडन ने स्कूलों में डिजिटल डिवाइस हटाकर फिर से किताब-कॉपी और पेन-पेपर की पढ़ाई को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। फ्रांस, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन और फिनलैंड जैसे देश भी स्कूलों में टैबलेट और लैपटॉप के इस्तेमाल को सीमित कर रहे हैं। यूनेस्को की रिपोर्ट भी चेतावनी दे चुकी है कि जब तक तकनीक वास्तव में सीखने में मददगार न हो, तब तक उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के लिए फायदेमंद नहीं है।
आत्मविश्वास ज्यादा, आत्ममंथन कमडॉ. जैरेड हॉरवाथ का कहना है कि Gen Z की एक बड़ी कमजोरी यह है कि वे अपनी बुद्धिमत्ता को लेकर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी हैं। उन्हें लगता है कि टेक्नोलॉजी में आगे होना ही समझदारी की निशानी है, जबकि यही तकनीक उनके मानसिक विकास में बाधा बन रही है।
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में बच्चों द्वारा रोजाना किताब पढ़ने की आदत में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो कोविड के बाद और तेज हुई है। घंटों फोन स्क्रॉल करना न सिर्फ एकाग्रता को कमजोर करता है, बल्कि युवाओं की मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर डाल रहा है।