क्या आपके बाल लगातार पतले हो रहे हैं? क्या पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे या चेहरे पर अचानक मुंहासों की समस्या बढ़ गई है? अक्सर महिलाएं इन संकेतों को तनाव, बढ़ती उम्र या सामान्य हार्मोनल उतार-चढ़ाव का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन परेशानियों के पीछे एक जरूरी मिनरल—जिंक—की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है।
जिंक शरीर में कई अहम प्रक्रियाओं को संचालित करता है। यह हार्मोनल संतुलन बनाए रखने, इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और कोशिकाओं की मरम्मत जैसे कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बावजूद इसके, इसकी कमी पर आमतौर पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बनी रह सकती हैं।
रोज कितनी मात्रा है जरूरी?
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार वयस्क महिलाओं को प्रतिदिन लगभग 8 से 12 मिलीग्राम जिंक की आवश्यकता होती है। हालांकि शाकाहारी आहार लेने वाली महिलाओं में इसकी कमी का खतरा ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों से जिंक का अवशोषण सीमित हो सकता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के मुताबिक, जिंक प्रजनन क्षमता, घाव भरने की प्रक्रिया, डीएनए निर्माण और इम्यून कोशिकाओं के विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद इसे अक्सर आयरन और कैल्शियम जितनी प्राथमिकता नहीं मिलती।
हार्मोनल गड़बड़ी से जुड़ा है संबंधविशेषज्ञ बताते हैं कि जिंक एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स को संतुलित रखने में सहायक होता है। इसकी कमी से ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है, पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और पीएमएस के लक्षण तीव्र हो सकते हैं। इसके अलावा त्वचा पर मुंहासों की समस्या भी बढ़ सकती है।
जिंक का संबंध थायरॉयड फंक्शन से भी है, जो शरीर की ऊर्जा और मासिक चक्र दोनों को प्रभावित करता है। यही कारण है कि थकान, कमजोरी और पीरियड्स की अनियमितता अक्सर एक साथ दिखाई देती हैं।
इम्यूनिटी और अन्य संकेतयदि बार-बार सर्दी-जुकाम हो रहा है, घाव भरने में देरी हो रही है या संक्रमण जल्दी-जल्दी हो रहे हैं, तो यह भी जिंक की कमी का संकेत हो सकता है। शरीर में सूजन, अनजाने में वजन कम होना या भूख में बदलाव जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
कुछ महिलाएं ज्यादा जोखिम में होती हैं—जैसे मेनोरेजिया या पीसीओएस से जूझ रही महिलाएं, सख्त शाकाहारी डाइट अपनाने वाली या लंबे समय से तनाव में रहने वाली महिलाएं। गर्भावस्था के दौरान भी जिंक की जरूरत बढ़ जाती है। दालों और अनाज में पाए जाने वाले फाइटेट्स जिंक के अवशोषण को कम कर सकते हैं, इसलिए इन्हें भिगोकर पकाना लाभकारी माना जाता है।
कैसे पूरी करें जिंक की जरूरत?जिंक के अच्छे स्रोतों में कद्दू के बीज, चना, मसूर दाल, काजू, बादाम, पालक, साबुत अनाज, अंडे, दही, सीफूड और लीन मीट शामिल हैं। चूंकि शरीर जिंक को लंबे समय तक संग्रहित नहीं करता, इसलिए रोजाना संतुलित मात्रा में इसका सेवन जरूरी है।
हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में जिंक लेने से तांबे के अवशोषण में बाधा आ सकती है और पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।