डॉक्टरों का कहना है कि आंखों से जुड़ी हर परेशानी का संबंध केवल आंखों तक सीमित नहीं होता। कई बार धुंधला दिखाई देना, नजर कमजोर होना या देखने में अन्य बदलाव दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत आंखों से जुड़े लक्षणों के जरिए सामने आती है। इसलिए यदि लंबे समय तक दृष्टि में असामान्य बदलाव बने रहें, तो उन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज करने की बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहद जरूरी है।
क्या आंखों की परेशानी ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकती है?अक्सर जब किसी व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है या देखने में किसी तरह की दिक्कत महसूस होती है, तो सबसे पहले यही माना जाता है कि शायद चश्मे का नंबर बदल गया है या आंखों की सामान्य जांच की जरूरत है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार समस्या का कारण आंखें ही नहीं होतीं।
कई बार आंखों में दिखाई देने वाले बदलाव शरीर के भीतर विकसित हो रही किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी की ओर भी इशारा कर सकते हैं। इनमें ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर स्थिति भी शामिल हो सकती है। ऐसे में यदि आंखों की रोशनी में लगातार बदलाव महसूस हो रहे हों या दृष्टि से जुड़ी समस्या बार-बार सामने आ रही हो, तो उसे हल्के में लेना सही नहीं है। समय पर पहचान होने से गंभीर बीमारी का इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकता है।
आंखें और दिमाग एक-दूसरे से हैं गहराई से जुड़ेविशेषज्ञ बताते हैं कि हमारी आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा संबंध दिमाग से होता है। जब हम किसी वस्तु को देखते हैं तो उसकी जानकारी ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) के माध्यम से दिमाग तक पहुंचती है। इसके बाद मस्तिष्क उस जानकारी को प्रोसेस कर हमें देखने और समझने में मदद करता है।
यदि इस पूरे रास्ते में कहीं भी ट्यूमर विकसित हो जाए, मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने लगे या ऑप्टिक नर्व प्रभावित हो जाए, तो सबसे पहले असर आंखों की रोशनी और देखने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर आंखों से जुड़े असामान्य लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं।
कुछ ब्रेन ट्यूमर सबसे पहले आंखों पर डालते हैं असरकुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर ऐसे होते हैं जिनके शुरुआती संकेत आंखों से जुड़ी समस्याओं के रूप में सामने आते हैं।
पिट्यूटरी एडेनोमा (Pituitary Adenoma):यह आमतौर पर सौम्य (Benign) ट्यूमर होता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि के आसपास विकसित होता है। यह धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल सकता है, जिससे नजर कमजोर होने लगती है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है।
क्रेनियोफैरिंजियोमा (Craniopharyngioma):यह ट्यूमर बच्चों और वयस्कों दोनों में देखा जा सकता है। यह भी पिट्यूटरी ग्रंथि के आसपास बनता है और दृष्टि संबंधी समस्याओं के साथ-साथ हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ सकता है।
ये ट्यूमर भी प्रभावित कर सकते हैं देखने की क्षमतामेनिन्जियोमा (Meningioma):यदि यह ट्यूमर ऑप्टिक नर्व या पिट्यूटरी क्षेत्र के आसपास विकसित हो जाए, तो यह देखने वाले मार्ग पर दबाव बना सकता है। इसके कारण धुंधला दिखाई देना, साइड विजन कम होना या धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर पड़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
ऑप्टिक पाथवे ग्लियोमा (Optic Pathway Glioma):यह ट्यूमर सीधे उस तंत्रिका मार्ग को प्रभावित करता है, जो आंखों से दृश्य संकेतों को दिमाग तक पहुंचाता है। इसके कारण समय के साथ दृष्टि लगातार कमजोर होती जाती है। यदि समय रहते इसकी पहचान न हो, तो देखने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करेंविशेषज्ञों के अनुसार यदि धुंधला दिखाई देना, एक या दोनों आंखों की रोशनी कम होना, साइड विजन घटना, बार-बार डबल विजन होना या बिना किसी स्पष्ट कारण के दृष्टि में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। जरूरी नहीं कि हर आंखों की समस्या ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो, लेकिन लगातार बने रहने वाले ऐसे लक्षणों की समय पर जांच गंभीर बीमारियों का जल्द पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।