अगर दिखें ये 10 संकेत, तो समझ लें शरीर पर भारी पड़ रहा है तनाव; डॉक्टर से संपर्क करना है जरूरी

आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में स्ट्रेस लगभग हर इंसान की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस का प्रेशर, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बढ़ता खर्च, लोन और ईएमआई—इन सबके बीच मानसिक दबाव महसूस होना आम है। सीमित मात्रा में तनाव शरीर को सतर्क रखता है, लेकिन जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है और शरीर उसे सहन नहीं कर पाता, तो यह कई गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याओं (Chronic Stress Effects) को जन्म दे सकता है।

इसलिए समय रहते यह पहचानना बेहद जरूरी है कि कहीं आपका शरीर ओवरलोड तो नहीं हो गया। कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिनके जरिए शरीर खुद बताने लगता है कि अब उसे राहत और मदद की जरूरत है। आइए जानते हैं उन 10 अहम लक्षणों (Stress Warning Signs) के बारे में।

हर वक्त थकान और ऊर्जा की कमी

अगर भरपूर नींद लेने के बाद भी आप खुद को सुस्त महसूस करते हैं या दिनभर शरीर में जान नहीं रहती, तो यह क्रॉनिक स्ट्रेस का संकेत हो सकता है। लगातार मानसिक दबाव शरीर की एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म कर देता है।

नींद का बिगड़ता पैटर्न

नींद न आना, रात में बार-बार जागना या जरूरत से ज्यादा सोना—ये तीनों ही तनाव से जुड़े संकेत हैं। तनावग्रस्त दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता, जिससे नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है।

पाचन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें

पेट दर्द, गैस, सूजन, कब्ज, दस्त या IBS जैसी समस्याएं अक्सर स्ट्रेस से जुड़ी होती हैं। दरअसल दिमाग और आंतों के बीच गहरा रिश्ता होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।

बार-बार बीमार पड़ना

लंबे समय तक बना तनाव इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार सर्दी, खांसी, बुखार या इंफेक्शन होने लगते हैं।

सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न

लगातार सिरदर्द, जबड़े में दर्द, गर्दन और कंधों में खिंचाव—ये सभी तनाव के शारीरिक लक्षण हैं। स्ट्रेस की स्थिति में शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में चला जाता है, जिससे मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं।

भूख में अचानक बदलाव

तनाव के दौरान किसी की भूख बहुत बढ़ जाती है तो किसी का खाने का मन ही नहीं करता। इसका कारण कोर्टिसोल हार्मोन का असंतुलन होता है, जो भूख को सीधे प्रभावित करता है।

एकाग्रता और निर्णय क्षमता में कमी

अगर आपको ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो रही है या छोटे फैसले लेना भी मुश्किल लग रहा है, तो यह स्ट्रेस का असर हो सकता है। तनाव दिमाग की प्रोसेसिंग पावर को कमजोर कर देता है।

दिल की धड़कन का तेज होना

तनाव शरीर को लगातार अलर्ट मोड में रखता है, जिससे हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर यह दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है।

मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन

बात-बात पर गुस्सा आना, बेवजह उदासी महसूस करना या अचानक मूड बदल जाना—ये सभी तनाव के भावनात्मक संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

त्वचा से जुड़ी समस्याएं

मुंहासे, एक्जिमा, सोरायसिस या स्किन एलर्जी जैसी दिक्कतें भी स्ट्रेस की वजह से उभर सकती हैं। तनाव हार्मोनल संतुलन बिगाड़ देता है, जिसका असर त्वचा पर साफ दिखता है।

अब क्या करें?

अगर आप इन लक्षणों में से कई संकेत खुद में महसूस कर रहे हैं, तो यह चेतावनी है कि अब शरीर तनाव को झेल नहीं पा रहा। ऐसे में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान देना, लाइफस्टाइल में बदलाव करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। समय पर कदम उठाना ही बेहतर सेहत की कुंजी है।