विवादों में घिरी फिल्म ‘The Kerala Story 2 - Goes Beyond’ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केरल हाई कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की पीठ ने सेंसर सर्टिफिकेट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि फिल्म को प्रमाणपत्र देते समय केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपेक्षित सतर्कता और गंभीरता नहीं दिखाई।
कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्रमाणन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा आवश्यक है। इस टिप्पणी ने सीधे तौर पर CBFC की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केरल की छवि और सामाजिक सौहार्द पर चिंताफिल्म के खिलाफ दायर याचिकाओं में शीर्षक और कथानक को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं—श्रीदेव नंबूदरी और फ्रेडी वी फ्रांसिस—का कहना है कि फिल्म का नाम और इसकी प्रस्तुति राज्य की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकती है। साथ ही आशंका जताई गई कि इसकी सामग्री से सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जस्टिस थॉमस ने इन आशंकाओं को गंभीर मानते हुए कहा कि जब तक सभी पक्षों की दलीलों पर विस्तृत सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने माना कि मामला संवेदनशील है और इसे सतर्क दृष्टिकोण से देखे जाने की आवश्यकता है।
CBFC को दो सप्ताह में पुनर्विचार का निर्देशहाई कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश दिया कि वह फिल्म की सामग्री और याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर नए सिरे से विचार करे। अदालत ने बोर्ड को दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का समय दिया है।
इस अवधि के दौरान फिल्म की रिलीज पर रोक जारी रहेगी। हालांकि, वकील अतुल रॉय द्वारा दायर एक अलग रिट याचिका को अदालत ने सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।
निर्माताओं की आपत्तियां नहीं हुईं स्वीकारसुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतें सार्वजनिक प्रकृति की हैं और इससे किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष कानूनी नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के अधिकार क्षेत्र पर भी प्रश्न उठाए।
इसके बावजूद अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने अतिरिक्त दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति दी और निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
यह निर्णय फिल्म की टीम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब मामला पूरी तरह से CBFC की पुनः समीक्षा और आगामी न्यायिक आदेश पर निर्भर करेगा। आने वाले दो सप्ताह इस विवादित फिल्म के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।