सलमान खान से क्लैश से डर गए थे राजामौली! ‘बाहुबली’ की रिलीज़ डेट बदलने के पीछे छिपी थी ये बड़ी चिंता

भारतीय सिनेमा के इतिहास में एस.एस. राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली’ का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान बनाए, बल्कि भारतीय फिल्मों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी नई ऊंचाई दी। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ (2015) की रिलीज़ से पहले राजामौली एक गहरे डर से जूझ रहे थे — और यह डर किसी और से नहीं, बल्कि सलमान खान से था। हां, वही सलमान जिनकी फिल्मों का नाम भर से बॉक्स ऑफिस पर हलचल मच जाती है।

राजामौली की चिंता – सलमान से टकराने का जोखिम नहीं!

हाल ही में राणा दग्गुबाती ने एक इंटरव्यू में इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ रिलीज़ के करीब थी, तब राजामौली सलमान खान की ‘बजरंगी भाईजान’ को लेकर चिंतित हो गए थे।

राणा ने बताया, “हम फिल्म के प्रमोशन में थे, तभी राजामौली ने कहा कि करण जौहर से बात करो — फिल्म की रिलीज़ डेट एक हफ्ता आगे बढ़ा दो। मैंने पूछा कि हिंदी में ऐसा कैसे होगा, सब कुछ तय हो चुका है। तब राजामौली ने कहा कि ‘उसी दिन सलमान खान की फिल्म रिलीज हो रही है, और मैं नहीं चाहता कि दोनों फिल्में टकराएं।’”

दरअसल, ‘बजरंगी भाईजान’ उस वक्त साल की सबसे बड़ी ईद रिलीज़ थी, और सलमान खान का स्टारडम इतना विशाल था कि राजामौली जानते थे — अगर क्लैश हुआ, तो ‘बाहुबली’ की हिंदी कमाई पर असर पड़ सकता है।

प्रभास और राणा की स्वीकारोक्ति – “सलमान का सिनेमा ऑर्डिनरी नहीं था”

इस चर्चा के दौरान प्रभास और राणा दग्गुबाती दोनों ने माना कि राजामौली का डर वाजिब था। प्रभास ने कहा, “सलमान खान का सिनेमा कोई साधारण सिनेमा नहीं था, वो सलमान की फिल्म थी — ‘बजरंगी भाईजान’।” राणा ने आगे जोड़ा, “राजामौली को उस फिल्म की कहानी पहले से पता थी, और वो मान चुके थे कि फिल्म बहुत अच्छी बनेगी। इसीलिए उन्होंने जोखिम नहीं उठाया।”

राजामौली का यह फैसला बाद में ‘बाहुबली’ के लिए वरदान साबित हुआ। क्योंकि एक हफ्ता पहले रिलीज़ होने से फिल्म को दर्शकों का पूरा ध्यान मिला — और जब तक ‘बजरंगी भाईजान’ आई, तब तक ‘बाहुबली’ पहले ही अपनी सफलता का झंडा गाड़ चुकी थी।

दोनों फिल्मों का जुड़ाव – एक ही लेखक, दो ब्लॉकबस्टर


दिलचस्प बात यह है कि ‘बाहुबली’ और ‘बजरंगी भाईजान’ — दोनों ही फिल्मों की कहानी वी. विजयेंद्र प्रसाद ने लिखी थी, जो एस.एस. राजामौली के पिता हैं। जहां ‘बाहुबली’ ने मिथकीय कथा और भव्यता से दर्शकों को मोहित किया, वहीं ‘बजरंगी भाईजान’ ने भावनाओं और मानवता का अद्भुत चित्रण किया। दोनों फिल्मों की सफलता ने भारतीय सिनेमा के दो छोरों — दक्षिण और बॉलीवुड — को एक सूत्र में बांध दिया।

करण जौहर की भूमिका – हिंदी दर्शकों तक पहुंचाने वाला सेतु

राजामौली की इस रणनीति को सफल बनाने में करण जौहर की भूमिका बेहद अहम रही। धर्मा प्रोडक्शंस ने ‘बाहुबली’ को हिंदी में डिस्ट्रीब्यूट किया, जिससे फिल्म को नॉर्थ इंडिया में भी जबरदस्त ओपनिंग मिली।

एक हफ्ते की यह दूरी ‘बाहुबली’ के लिए लाइफलाइन साबित हुई — फिल्म ने हिंदी बेल्ट में रिकॉर्डतोड़ कमाई की, और धीरे-धीरे यह एक पैन-इंडिया फेनॉमेनन बन गई।

यह कहानी बताती है कि भारतीय सिनेमा में रणनीति, समय और सम्मान कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। एस.एस. राजामौली ने सलमान खान के स्टारडम को देखकर पीछे हटने का फैसला लिया, पर यह पीछे हटना नहीं, बल्कि समझदारी से आगे बढ़ना था।

आज ‘बाहुबली’ और ‘बजरंगी भाईजान’ दोनों ही भारतीय फिल्म इतिहास के मील के पत्थर हैं — और दोनों का जुड़ाव यह सिखाता है कि सिनेमा में प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग ही असली जीत है।