1991 हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक बेहद खास साल के रूप में दर्ज है। इस साल इंडस्ट्री में कई दिग्गज सितारों की बहुचर्चित फिल्में एक के बाद एक रिलीज़ हुईं—अमिताभ बच्चन की हम, दिलीप कुमार और राज कुमार की सौदागर, अनिल कपूर और श्रीदेवी की लम्हे, और संजय दत्त-सलमान खान की बहुचर्चित रोमांटिक ड्रामा साजन। जहां हम और सौदागर जैसी बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर चर्चा का विषय बनीं, वहीं अपेक्षाकृत कम बजट में बनी साजन ने सबको पीछे छोड़ दिया और साल की सबसे बड़ी हिट बन गई।
‘हम’: बिग बी की स्टार पॉवर से सजी मसाला एंटरटेनरनिर्देशक मुकुल एस. आनंद द्वारा निर्देशित हम एक मल्टी-स्टारर फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन, किमी काटकर, रजनीकांत, गोविंदा, अनुपम खेर, अन्नू कपूर और डैनी डेन्जोंगपा जैसे कलाकार शामिल थे। अमिताभ बच्चन के करियर को हम ने एक नया मुकाम दिया था। विशेष रूप से फिल्म का एक दृश्य जिसमें अमिताभ बच्चन का किरदार टाइगर जब बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ अपने बालों से झटका देता है वहीं पर कमाल हो जाता है। फिल्म की सफलता में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत का भी बड़ा योगदान रहा था। खासकर जुम्मा चुम्मा दे दे गीत ने युवाओं के बीच तहलका मचा दिया था। करीब 4 करोड़ रुपये के बजट में बनी हम ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 15.75 करोड़ रुपये की कमाई की थी और यह साल की दूसरी सबसे बड़ी हिट रही।
सौदागर: दो दिग्गजों की भव्य वापसीसुभाष घई के निर्देशन में बनी सौदागर प्रदर्शन से पूर्व ही चर्चाओं में आ गई थी। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि इस फिल्म में 30 साल के लम्बे अन्तराल के बाद दिलीप कुमार और राजकुमार एक साथ नजर आने वाले थे। उन दिनों फिल्म उद्योग में इस बात की चर्चा थी कि आखिर सुभाष घई ने यह कैसे कर दिखाया। सौदागर से पहले दिलीप कुमार और राजकुमार पैगाम में नजर आए थे, जो 1960 में प्रदर्शित हुई थी। इसके बाद इन दोनों महान सितारों ने कभी एक साथ काम नहीं किया था। इन दोनों सितारों का एक साथ नजर आना ही सौदागर की सफलता का सबसे बड़ा कारण था। इस फिल्म के जरिये सुभाष घई ने फिल्म उद्योग को मनीषा कोइराला जैसी बेहतरीन अभिनेत्री दी।
सौदागर 1991 की तीसरी सबसे बड़ी हिट थी, सुभाष घई द्वारा निर्देशित यह फिल्म भी उस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक थी। इसकी कहानी, संवाद और गाने खासे लोकप्रिय हुए। फिल्म ने लगभग ₹13 करोड़ की कमाई की थी, जो उस साल के लिए एक बेहतरीन आंकड़ा था, लेकिन साजन और हम से पीछे रही।
‘लम्हे’ : अपने समय से आगे की फिल्म थीवर्ष 1989 में चाँदनी की जबरदस्त सफलता के बाद रोमांस के बादशाह के नाम से ख्यात निर्देशक यश चोपड़ा ने अनिल कपूर श्रीदेवी को लेकर लम्हे नामक फिल्म बनाई। इस फिल्म में श्रीदेवी दोहरी भूमिका में नजर आई थीं। लम्हे के कथानक को लेकर कहा गया कि यह अपने समय से आगे की फिल्म है। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने उतना कारोबार नहीं किया जितने की उम्मीद इसके निार्मताओं को थी। इसके बावजूद अपने सशक्त कथानक, बेमिसाल अभिनय और उम्दा फोटोग्राफी के चलते इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 10 करोड़ का आंकड़ा पाने में सफलता पाई थी। आज लम्हे हिन्दी फिल्मों की कल्ट क्लासिक में शामिल है। लम्हे 1991 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म रही।
योद्धासनी देओल और संजय दत्त की यह फिल्म साल 1991 की पाँचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन राहुल रवैल ने किया था। फिल्म में सनी देओल और संजय दत्त के अलावा संगीता बिजलानी, परेश रावल, डैनी डेन्जोंगपा प्रमुख भूमिकाओं में थे। इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार भी मिला था।
‘साजन’: 1991 की सबसे बड़ी हिट, संजय दत्त का इमोशनल इम्पैक्ट और क्लासिक संगीत का जादूसाजन का निर्देशन छायाकार लॉरेंस डिसूज़ा ने किया था। यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म थी और फिल्म का निर्माण सुधाकर बोकाड़े ने किया था। फिल्म में उस समय की प्रसिद्ध तिकड़ी संजय दत्त, सलमान खान और माधुरी दीक्षित ने पहली बार स्क्रीन शेयर किया। इस लव ट्रायंगल ड्रामा की कहानी भावनात्मक और सादगी से भरपूर थी, जिसने सीधे दर्शकों के दिल में जगह बना ली। लेकिन जो चीज़ सबसे ज्यादा गूंजी, वह थी फिल्म का संगीत। नदीम-श्रवण द्वारा रचित और समीर द्वारा लिखित गानों ने उस समय के लगभग सभी म्यूजिक चार्ट्स पर कब्जा कर लिया था—देखा है पहली बार, मेरा दिल भी कितना पागल है, और तू शायर है, मैं तेरी शायरी जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
फिल्म मात्र 1.6 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन इसने भारत में ₹18 करोड़ की शानदार कमाई की। यह आंकड़ा हम और सौदागर जैसी बड़े बजट की फिल्मों से अधिक था। इसी वजह से साजन 1991 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी और साल की ब्लॉकबस्टर घोषित की गई।
‘साजन’ का संजय दत्त को सुपरस्टार की कतार में लानासाजन की अभूतपूर्व सफलता ने न केवल संजय दत्त के करियर को नया आयाम दिया, बल्कि यह सिद्ध कर दिया कि एक सशक्त कहानी, यादगार संगीत और भावनात्मक परफॉर्मेंस बड़ी स्टारकास्ट से भी आगे निकल सकती है। यह फिल्म आज भी 90 के दशक की सबसे प्यारी रोमांटिक फिल्मों में से एक मानी जाती है। संजय दत्त के अभिनय ने उन्हें एक्शन हीरो से इमोशनल हीरो की पहचान भी दिलाई।
इस तरह, 1991 में साजन ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर, बल्कि दर्शकों के दिलों पर भी राज किया और हम व सौदागर जैसी मेगा बजट फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।