17 साल की उम्र में नक्सली बनने का था सपना, पवन कल्याण बोले- चिरंजीवी ने समय रहते समझाया

साउथ सिनेमा के मशहूर अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अपने युवावस्था के दिनों को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने उनके प्रशंसकों और राजनीतिक समर्थकों दोनों को चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह अभिनय या राजनीति नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन से जुड़ने का विचार कर रहे थे। हालांकि, उनके बड़े भाई और साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी की एक सलाह ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें जीवन की नई दिशा दिखाई।

हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान पवन कल्याण ने अपने किशोरावस्था के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह समाज में फैले अन्याय, हिंसा और वैश्विक घटनाओं से बेहद प्रभावित थे। उस दौर में उनके भीतर व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश था और यही वजह थी कि उन्हें उग्र विचारधाराओं की ओर आकर्षण महसूस होने लगा था।

पवन कल्याण ने बताया कि 1980 के दशक में एक किशोर के रूप में उन्होंने दुनिया में हो रही कई घटनाओं को करीब से महसूस किया। दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद, श्रीलंका में एलटीटीई आंदोलन, शीत युद्ध का प्रभाव, जर्मनी के पुनर्एकीकरण के बाद की परिस्थितियां और भारत में खालिस्तान से जुड़ी घटनाओं ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी थी। इन सब घटनाओं को देखकर उन्हें लगता था कि समाज में बदलाव लाने के लिए कुछ बड़ा और कठोर कदम उठाना जरूरी है।

उन्होंने स्वीकार किया कि करीब 17 वर्ष की उम्र में उनके मन में नक्सली संगठन से जुड़ने का विचार गंभीरता से आया था। पवन ने कहा कि उस समय उन्हें लगता था कि बंदूक उठाकर अन्याय के खिलाफ लड़ना ही शायद सही रास्ता है। उन्होंने यहां तक बताया कि वह कुछ जनसभाओं और बैठकों में भी शामिल हुए थे, जहां ऐसे विचारों पर चर्चा होती थी। हालांकि उस समय उनकी पहचान नहीं थी और वह एक सामान्य युवा की तरह इन गतिविधियों को समझने और परखने की कोशिश कर रहे थे।

पवन कल्याण के अनुसार, यह दौर उनके जीवन का सबसे उथल-पुथल भरा समय था। वह लगातार नए अनुभवों की तलाश में रहते थे। कभी छात्रों के साथ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते, तो कभी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल और डॉक्यूमेंट्री निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए मुंबई तक पहुंच जाते थे। उन्हें उम्मीद थी कि इन प्रयोगों के जरिए वह अपने भीतर उठ रहे सवालों के जवाब खोज पाएंगे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही थी।
उन्होंने बताया कि उस समय उनके अंदर गुस्सा, बेचैनी और असंतोष का भाव लगातार बढ़ रहा था। उन्हें लगता था कि समाज की समस्याओं का समाधान केवल कठोर संघर्ष से ही संभव है। लेकिन इसी दौरान उनके बड़े भाई चिरंजीवी ने उनके जीवन में निर्णायक हस्तक्षेप किया और उन्हें सोचने का एक नया नजरिया दिया।

पवन ने कहा कि चिरंजीवी ने उनसे एक बेहद साधारण लेकिन गहरा सवाल पूछा था। उन्होंने कहा, “अगर तुम्हारे ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां होतीं, अगर कोई तुम्हारी कमाई और मेहनत पर निर्भर होता, तो क्या तब भी तुम यही रास्ता चुनते?” यह सवाल सुनकर पवन कल्याण पूरी तरह निरुत्तर हो गए। उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था और पहली बार उन्होंने अपने फैसलों को दूसरे दृष्टिकोण से देखना शुरू किया।

पवन कल्याण ने बताया कि भाई की इस बात ने उन्हें आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया। उन्हें एहसास हुआ कि केवल गुस्से के आधार पर जीवन के बड़े फैसले नहीं लिए जा सकते। इसके बाद उन्होंने अपने भीतर की बेचैनी को समझने और उसे सही दिशा देने की कोशिश शुरू की।

उन्होंने कहा कि जीवन के उस मोड़ पर उन्होंने आध्यात्मिकता की ओर रुख किया। खुद को बेहतर ढंग से समझने और मानसिक संतुलन पाने के लिए उन्होंने अध्यात्म का सहारा लिया। बाद में इसी प्रक्रिया ने उन्हें अभिनय की दुनिया की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी। एक्टिंग क्लास जॉइन करने से पहले उन्होंने अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीखा, जिससे उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।

आज पवन कल्याण न केवल साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों में गिने जाते हैं, बल्कि राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनका यह खुलासा दिखाता है कि युवावस्था में भटकाव और आक्रोश की स्थिति किसी के भी जीवन में आ सकती है, लेकिन सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच इंसान को नई दिशा देने का काम करती है। पवन का मानना है कि यदि उस समय उनके भाई ने उन्हें सही सलाह न दी होती, तो शायद उनका जीवन आज बिल्कुल अलग रास्ते पर होता।