परिणीति चोपड़ा पिछले साल मां बनी थीं और तब से उनकी जिंदगी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। हाल ही में एक्ट्रेस ने मां बनने के बाद के अनुभवों को लेकर खुलकर बातचीत की और बताया कि पोस्टपार्टम फेज में वह खुद को कैसे संभाल रही हैं। परिणीति का कहना है कि उन्होंने पोस्टपार्टम के दो महीने पूरे कर लिए हैं और अब धीरे-धीरे अपनी रूटीन लाइफ में लौट रही हैं। इस दौरान मानसिक शांति और खुद के साथ समय बिताना उनके लिए सबसे अहम रहा है।
पोस्टपार्टम के दौर में मानसिक शांति पर फोकसपरिणीति ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किए गए एक हालिया वीडियो में इस विषय पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि इस समय उनके लिए मेंटल हेल्थ और मेडिटेशन बेहद जरूरी हो गए हैं। एक्ट्रेस का मानना है कि मन की स्थिति का सीधा असर शरीर पर पड़ता है। उन्होंने कहा, “अगर आपका दिमाग पॉजिटिव रहता है, तो आपका शरीर भी उसी एनर्जी के साथ काम करता है।” उनके मुताबिक, सकारात्मक सोच न सिर्फ भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि शारीरिक रिकवरी में भी मदद करती है।
सुबह की शुरुआत फोन से नहीं, सुकून सेपरिणीति ने सुबह उठते ही फोन देखने की आदत को नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि आजकल ज्यादातर लोग आंख खुलते ही मोबाइल स्क्रॉल करने लगते हैं, जो दिमाग को थका देता है। उनके शब्दों में, “सबसे खराब आदत यही है कि लोग उठते ही फोन चलाने लगते हैं। इससे दिमाग लगभग सुन्न हो जाता है और पूरा दिन प्रभावित हो सकता है।” एक्ट्रेस ने बताया कि वह सुबह उठते ही फोन को हाथ नहीं लगातीं। इसके बजाय वह खुद को शांत समय देती हैं—कभी चुपचाप बैठकर, कभी संगीत सुनकर या फिर प्रकृति के बीच समय बिताकर। उनका कहना है कि सुबह का एक घंटा अगर बिना फोन के बिताया जाए, तो मन काफी स्थिर और हल्का महसूस करता है।
हनुमान चालीसा और मंत्र जाप से मिलती है ताकतपरिणीति ने यह भी साझा किया कि आध्यात्मिकता उन्हें पोस्टपार्टम फेज में बेहद सहारा देती है। उन्होंने कहा, “मैं सुबह उठते ही मंत्रों का जाप करती हूं। खासतौर पर हनुमान चालीसा पढ़ती हूं या ‘नमामि शमीशम’ का जाप करती हूं। इसी तरह से मैं अपने दिन की शुरुआत करना पसंद करती हूं।” एक्ट्रेस का मानना है कि जब दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है, तो फिर दिन में चाहे जैसी भी परिस्थितियां आएं—अच्छी हों या बुरी—उन पर रिएक्शन को कंट्रोल किया जा सकता है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें लगता है जैसे वह बिस्तर से किसी फिल्मी सीन की तरह स्लो मोशन में उठ रही हों। उनके लिए यह एहसास दिनभर की ऊर्जा और आत्मविश्वास की नींव बन जाता है।