करीब तीन दशक पहले, एक ऐसी फिल्म ने भारतीय सिनेमा में दस्तक दी थी जिसने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई, बल्कि दर्शकों के दिलों पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ दी। नाना पाटेकर की दमदार अदाकारी से सजी इस फिल्म ने एक अलग ही स्तर की पहचान बनाई थी। बात हो रही है साल 1994 में रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ की — एक ऐसी फिल्म जिसे देखकर लोग आज भी भावुक हो जाते हैं और खास तौर पर उसका क्लाइमैक्स, जो स्क्रिप्ट का हिस्सा ही नहीं था, आज भी सिनेमा प्रेमियों के लिए एक मिसाल है।
नाना पाटेकर का अभिनय बना फिल्म की जान22 जुलाई 1994 को रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ एक्शन और ड्रामा का मेल थी, जिसमें समाज में फैले भ्रष्टाचार को केंद्र में रखकर आम आदमी की लड़ाई को दिखाया गया था। फिल्म में नाना पाटेकर के साथ डिंपल कपाड़िया, ममता कुलकर्णी, अतुल अग्निहोत्री, परेश रावल, डैनी डेंजोंगपा, फरीदा जलाल और खुद निर्देशक मेहुल कुमार भी नज़र आए थे। लेकिन जिस चीज़ ने सबसे ज़्यादा दर्शकों को झकझोरा, वो थी नाना पाटेकर की परफॉर्मेंस — एकदम वास्तविक, ज़ोरदार और भावनात्मक।
क्रांतिवीर की कमाई ने उड़ाए होशइस फिल्म को मेहुल कुमार ने लिखा, निर्देशित और निर्मित किया था। सिर्फ 2 करोड़ की सीमित लागत में बनी इस फिल्म ने Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 14.81 करोड़ की शानदार कमाई की थी। भारत में ही इसका नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 14.60 करोड़ रहा था, जो उस समय के लिहाज से एक बड़ी बात थी। इसकी सफलता को देखते हुए फिल्म को 'ब्लॉकबस्टर' का दर्जा मिला। जो दर्शक आज इसे फिर से देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म अमेजॉन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है।
जब स्क्रिप्ट से बाहर जाकर बना क्लासिक क्लाइमैक्सजनवरी 2024 में ‘लल्लनटॉप’ को दिए गए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने इस फिल्म से जुड़ा एक खास किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि 'क्रांतिवीर' उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक थी। खास बात यह थी कि फिल्म का जो क्लाइमेक्स दर्शकों को आज तक याद है, वह कभी लिखा ही नहीं गया था।
शूटिंग के समय नाना पाटेकर की तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। प्रोड्यूसर ने उन्हें मना किया था कि क्लाइमेक्स सीन शूट न किया जाए, क्योंकि उसकी स्क्रिप्ट तैयार नहीं थी और समय की कमी थी। बावजूद इसके, नाना ने प्रोड्यूसर को मनाया और सेट पर आ गए। डायरेक्टर ने उन्हें सीन की रूपरेखा दी और फिर जो हुआ, वह इतिहास बन गया। बिना लिखी स्क्रिप्ट के नाना ने ऐसा भावनात्मक सीन निभाया, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया और वही दृश्य फिल्म का पहचान बन गया।
एक मिसाल जो आज भी कायम है‘क्रांतिवीर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सिनेमा की एक प्रेरणादायक कहानी है जो यह बताती है कि जब कलाकार अपने किरदार से पूरी तरह जुड़ जाते हैं, तो वे चमत्कार कर सकते हैं। आज भी जब इस फिल्म का नाम लिया जाता है, लोग नाना पाटेकर के उस दमदार किरदार को याद करते हैं जिसने भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी।