एक्टर आयुष्मान खुराना काफी प्रतिभाशाली हैं। अपनी फिल्मों में कमाल की एक्टिंग से वे यह बात साबित कर चुके हैं। आयुष्मान ने अदाकारी में कई प्रयोग किए हैं। उनका हर अंदाज उन्हें बड़े पर्दे पर खास दिखाता है। फिलहाल हम बात कर रहे हैं आयुष्मान की फिल्म ‘दम लगाके हईशा’ की, जो बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही थी। सादगी से भरी कहानी और जबरदस्त कॉमेडी वाली फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इस मूवी ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता। इस फिल्म को रिलीज हुए आज 27 फरवरी को 10 साल पूरे हो गए हैं। आयुष्मान ने इस फिल्म को याद करते हुए कहा कि रिलीज से पहले मैं कई रातों तक सो नहीं पाया था।
‘विकी डोनर’ की जबरदस्त सफलता ने मुझे अचानक स्टार बना दिया, लेकिन मुझे समझ ही नहीं आया कि इस सफलता को कैसे आगे बढ़ाना है। मैं इंडस्ट्री में नया था, मेरे पास कोई गाइडेंस नहीं थी और मैंने कई गलत फैसले लिए। जिसके बाद बैक टू बैक मेरी 3 फिल्में फ्लॉप हो गई। इंडस्ट्री में कहते हैं कि हर शुक्रवार हम फिर से जन्म लेते हैं और हमारा करिअर भी उसी दिन तय होता है। मैं बस यही चाहता था कि यह शुक्रवार मेरा हो! रिलीज से पहले मैं पूरी तरह घबराया हुआ था, लेकिन फिल्म हिट हुई और इसने मुझे इंडस्ट्री में एक नई पहचान दी।
‘दम लगाके हईशा’ ने मुझे दोबारा जन्म दिया। इस सक्सेस के लिए मैं डायरेक्टर शरत कटारिया, मनीष शर्मा, आदित्य चोपड़ा सर और मेरी को-स्टार भूमि पेडनेकर का दिल से धन्यवाद करता हूं। आयुष्मान ने इंस्टाग्राम पर एक पुरानी फोटो भी शेयर की, जिसमें वे ब्लैक-प्रिंटेड स्वेटर पहने नजर आ रहे हैं। उनके हाथ में एक कागज है और वे कैमरे की तरफ देख रहे हैं। फोटो पर लिखा है, “10 साल पहले मेरे लिए एक पत्र…” अगली स्लाइड में एक प्यारा सा नोट था, जिसमें लिखा था, “धीरे चलो, पागल बच्चे। तुम ठीक हो जाओगे। तुम जीवन की अनिश्चितताओं, उतार-चढ़ावों को देखोगे और तुम और मजबूत होकर उभरोगे। तुम्हारी बड़ी योजना पूरी तरह से गुप्त होनी चाहिए। इसमें बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं है। लक्ष्य केवल हिट स्कोर करना नहीं है। एक बहुत बड़ी योजना है।”
सिंगर पंकज उधास की दोनों बेटियों ने दी ‘बैठी हो क्यों गुमसुम’ गाने की जानकारीदिग्गज गायक पंकज उधास का 26 फरवरी 2024 को 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। लंबी बीमारी के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी। पंकज ने अपने करिअर में ढेरों लोकप्रिय गानों को आवाज दी। हालांकि उन्हें सबसे ज्यादा शौहरत नाम फिल्म के गाने ‘चिट्ठी आई है…’ से मिली थी। पंकज की पहली पुण्यतिथि पर उनका आखिरी गीत 'बैठी हो क्यों गुमसुम' रिलीज किया गया। यह गजल उस्ताद को एक सच्ची श्रद्धांजलि है, जो उन्हें प्रशंसकों और श्रोताओं के बीच जिंदा रखती है।
भूषण कुमार के नेतृत्व वाली टी-सीरीज ने हंगामा डिजिटल मीडिया एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और एमडी नीरज रॉय के साथ मिलकर पंकज को श्रद्धांजलि दी है। पंकज की बेटियों नायाब और रेवा ने ट्रैक के बारे में कहा कि लीजेंड कभी भुलाए नहीं जाते और न ही उनका संगीत। हमारे पिता की आवाज में हमेशा दिलों को छूने की शक्ति रही है और ‘बैठी हो क्यों गुमसुम’ के साथ एक बार फिर ऐसा साबित हुआ है। यह सिर्फ एक और रिलीज नहीं है, बल्कि यह उनके खजाने से पहला अनरिलीज्ड गीत है, जिसे लेकर हम बेहद भावुक थे।
उनकी पहली पुण्यतिथि पर इसे रिलीज करना इस पल को और भी विशेष बनाता है। गुलशन जी और टी-सीरीज के साथ उनका रिश्ता संगीत से कहीं बढ़कर था। यह विश्वास, सम्मान और सुर की नींव पर बना संबंध था। भले ही हमारे पिता यहां नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, आत्मा और कालातीत संगीत यहां मौजूद है। उल्लेखनीय है कि इस गीत के बोल पंकज उधास ने ही लिखे हैं। इसमें गायिका प्रतिभा सिंह बघेल की भी आवाज है। संगीत वीडियो का डायरेक्शन आरिफ खान ने किया है।