फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसी दुनिया है, जहां एक पल में सितारे बनते हैं और अगले ही पल गुमनामी में खो जाते हैं। आपने अक्सर ऐसे कलाकारों की कहानियां सुनी होंगी जिन्होंने चमक-धमक भरी दुनिया में खूब नाम कमाया, लेकिन वक्त के थपेड़ों ने उन्हें पीछे धकेल दिया। जहां कुछ सितारे इस उतार-चढ़ाव से टूट जाते हैं, वहीं कुछ अपनी अलग राह बना लेते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं संजय खान, जिन्होंने 22 साल से कोई फिल्म नहीं की, फिर भी वो करोड़ों की दुनिया में जी रहे हैं—बिल्कुल शान से, सम्मान से और संयम से।
बिजनेस से बनाई अलग पहचान, एक्टिंग के बिना भी करोड़ों में खेलते हैंसंजय खान ने फिल्मों से भले ही दूरी बना ली हो, लेकिन उनकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी। उनका जन्म बेंगलुरु में एक अफगानी पिता और पारसी मां के घर हुआ था। उनका असली नाम अब्बास अली खान था। एक्टिंग के बाद उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और अपनी मेहनत से एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 80 के दशक में ही चावल एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू कर दिया था। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में उनका कारोबार तेजी से फैला।
ड्रीम प्रोजेक्ट बना लग्जरी होटल1997 में संजय खान ने बेंगलुरु में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट—गोल्डन पाम्स होटल एंड स्पा की शुरुआत की। उनकी पत्नी जरीन खान ने इस होटल के इंटीरियर्स को डिज़ाइन किया था। 150 कमरों वाला यह होटल लग्जरी और भव्यता का प्रतीक बन गया। 2010 तक इसका पूरा मालिकाना हक उनके पास रहा।
इसके अलावा उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर में भी कदम रखा और एसके प्रॉपर्टीज नाम से एक कंपनी बनाई। इतना ही नहीं, उन्होंने 2018 में 10 हजार करोड़ रुपये के एक थीम पार्क का ऐलान भी किया था। हालांकि यह प्रोजेक्ट कुछ विवादों के चलते बंद हो गया।
टीवी की दुनिया में भी छाए रहेफिल्मों के बाद संजय खान ने टेलीविजन की दुनिया में भी अपना नाम कमाया। उन्होंने ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ को डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया, जो एक बेहद लोकप्रिय सीरियल साबित हुआ। ये शो ही उनके एक्टिंग करियर की आखिरी झलक बन गया।
इसके अलावा उन्होंने 'जय हनुमान', 'द ग्रेट मराठा', और '1857 क्रांति' जैसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक शो भी बनाए, जो आज भी दर्शकों की स्मृति में बसे हुए हैं।
हनुमान जी से गहरा जुड़ाव: मुसलमान होकर भी कहलाए 'हनुमान भक्त'संजय खान की जिंदगी में भगवान हनुमान की भक्ति एक खास मोड़ लेकर आई। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब वो एक गंभीर दुर्घटना के बाद 13 महीने तक अस्पताल में भर्ती थे और जीवन-मृत्यु के संघर्ष में थे, तब एक हनुमान मंदिर के पुजारी ने उनके लिए निरंतर प्रार्थना की।
स्वस्थ होने के बाद उन्होंने जयपुर के पास समोद पैलेस के एक हनुमान मंदिर में दर्शन किए, जहां उन्हें ईश्वर की शक्ति का वास्तविक अनुभव हुआ। इस अनुभव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने हनुमान जी पर आधारित एक सीरियल 'जय हनुमान' बनाया, जो दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ।