हिंदी सिनेमा के महानायक धर्मेंद्र (Dharmendra Death) अब इस दुनिया में नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली (Dharmendra Passes Away)। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे धर्मेंद्र भले ही जीवन से विदा हो गए हों, लेकिन भारतीय फिल्म इतिहास में उन्होंने जो अमिट पहचान बनाई है, वह पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। पंजाब के साधारण से गांव में जन्मे धरम सिंह देओल ने मेहनत, आकर्षण और अपनी सादगी से बॉलीवुड को ऐसा मुकाम दिया जिससे वह हमेशा ‘सदाबहार हीरो’ के रूप में याद किए जाएंगे।
छह दशक लंबे करियर में उन्होंने अनेक सुपरहिट फ़िल्मों से अपनी एक अलग विरासत रची—एक ऐसी विरासत जिसने उन्हें इंडस्ट्री का असली ‘ही-मैन’ बना दिया।
60 वर्षों से भी अधिक फैला अद्भुत करियरधर्मेंद्र का फ़िल्मी सफर 60 साल से भी लंबा रहा, जिसमें उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं में अपना जौहर दिखाया—जोशीली एक्शन भूमिकाओं से लेकर सौम्य, भावपूर्ण और दिल को छू लेने वाले किरदारों तक। कभी वह दर्शकों को हंसाते दिखे, तो कभी अपनी इमोशनल परफॉर्मेंस से लोगों की आंखें नम कर गए। 8 दिसंबर 1935 को जन्मे धर्मेंद्र ने 1960 में फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से बॉलीवुड में कदम रखा। उनका व्यक्तित्व, स्क्रीन प्रेज़ेंस और अनोखी करिश्माई अदाएं इतनी खास थीं कि उन्होंने जल्दी ही दर्शकों का दिल जीत लिया और भारत के साथ-साथ विदेशों तक में अपनी एक बड़ी फैन फॉलोइंग बना ली।
टॉप हीरोइनों के साथ ऑन-स्क्रीन रोमांस का जादूहालांकि धर्मेंद्र को ‘रफ-टफ’ हीरो की छवि से पहचान मिली, लेकिन रोमांटिक किरदारों में भी उनका कोई जवाब नहीं था। 60 और 70 के दशक का दौर उनके नाम रहा—इस दौरान वह मीना कुमारी, आशा पारेख, हेमा मालिनी जैसी शीर्ष अभिनेत्रियों के साथ रोमांटिक फिल्मों के लिए मशहूर हुए। बंदिनी, फूल और पत्थर, अनुपमा जैसी फिल्मों ने उन्हें संवेदनशील, गंभीर और दमदार कलाकार के रूप में स्थापित किया।
1966 में आई फूल और पत्थर ने उन्हें पहली बड़ी सफलता दिलाई, और दर्शकों ने मान लिया कि धर्मेंद्र हर तरह की भूमिकाओं के लिए ‘परफेक्ट’ हीरो हैं।
‘शोले’ ने बदल दी तकदीर, बना दिया आइकॉन1975 में रिलीज़ हुई शोले धर्मेंद्र के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। वीरू का उनका किरदार आज भी पॉपुलर कल्चर का हिस्सा है—संवाद, अंदाज़, एक्शन… सब कुछ दर्शकों के दिल में अमर हो गया। इसके बाद चुपके चुपके, यादों की बारात, ड्रीम गर्ल, धरमवीर जैसी सुपरहिट फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और वह लगातार बॉक्स ऑफिस पर सफल होते रहे।
एक्शन हीरो से देशभक्ति फिल्मों तक—हर रूप में पसंद आएरोमांटिक इमेज के बाद धर्मेंद्र ने 80 और 90 के दशक में एक्शन और देशभक्ति फिल्मों की ओर रुख किया। उनके दमदार संवाद, शक्तिशाली स्क्रीन प्रेज़ेंस और जोशीले अभिनय ने उन्हें दर्शकों का चहेता बनाए रखा। अपने बेटों सनी और बॉबी देओल को लॉन्च करते समय भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यमला पगला दीवाना सीरीज़ में उनकी कॉमिक टाइमिंग का नया रूप देखने को मिला, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। कभी पिता तो कभी दादा के किरदार में भी धर्मेंद्र ने पारिवारिक भावनाओं को बखूबी परदे पर उतारा।
300 से अधिक फिल्में… और एक सदाबहार विरासतलगभग 300 फिल्मों में अभिनय कर धर्मेंद्र ने वह मुकाम हासिल किया जिसे बहुत कम कलाकार छू पाते हैं। वह केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे सितारे थे जिनके बिना हिंदी सिनेमा का इतिहास अधूरा है। उनकी आखिरी फिल्म “इक्कीस” (2025) दर्शकों को उनका अंतिम अभिनय उपहार देगी।
धर्मेंद्र की प्रमुख फिल्मेंदिल भी तेरा हम भी तेरे (1960)
बंदिनी (1963)
फूल और पत्थर (1966)
अनुपमा (1966)
सत्यकाम (1969)
यादों की बारात (1973)
शोले (1975)
चुपके चुपके (1975)
ड्रीम गर्ल (1977)
धरम वीर (1977)
राम बलराम (1980)
हुकुमत (1987)
एलान-ए-जंग (1988)
यमला पगला दीवाना (2011–2018)
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी (2024)
इक्कीस (2025 – अंतिम फिल्म)