मानसून में स्किन पर नारियल तेल का इस्तेमाल, वरदान या नुकसान? जानें क्या कहते है एक्सपर्ट्स?

बरसात का मौसम भले ही ठंडी हवाओं, मिट्टी की सोंधी खुशबू और चारों ओर हरियाली का तोहफा देता है, लेकिन स्किन के मामले में यह मौसम कभी-कभी चुनौती भी बन जाता है। लगातार बनी रहने वाली नमी और उमस के कारण त्वचा में रैशेज़, खुजली, पिंपल्स और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या मानसून में नारियल तेल का इस्तेमाल सही है या फिर यह आपकी स्किन के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है? आइए, विशेषज्ञों की राय जानते हैं।

नारियल तेल—स्किन का साथी या शत्रु?

नारियल तेल में प्राकृतिक विटामिन E और हेल्दी फैटी एसिड्स होते हैं, जो त्वचा को पोषण देने और नमी बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन मानसून में हवा में पहले से ही काफी नमी होने के कारण, स्किन जल्दी ऑयली हो जाती है और पसीना भी अधिक आता है। इस स्थिति में तेल लगाने से त्वचा के रोमछिद्र (pores) बंद हो सकते हैं, जिससे पिंपल्स और एक्ने बढ़ सकते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आपकी त्वचा ड्राई या नॉर्मल है, तो सीमित मात्रा में नारियल तेल का प्रयोग मानसून में स्किन को मुलायम और हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकता है। लेकिन जिनकी स्किन पहले से ऑयली है, उन्हें इस मौसम में नारियल तेल से दूरी बनाए रखना चाहिए।

रात का समय—बेहतर विकल्प

दिन के समय नारियल तेल लगाने से धूल-मिट्टी और प्रदूषण स्किन पर आसानी से चिपक जाते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मानसून में नारियल तेल का इस्तेमाल रात को सोने से पहले करना सबसे अच्छा माना जाता है। हल्की मालिश के साथ नारियल तेल लगाने से स्किन को गहराई तक पोषण मिलता है और यह सोते समय डीप मॉइस्चराइज़र की तरह काम करता है।

तेल लगाने से पहले सफाई बेहद जरूरी

मानसून में पसीना और गंदगी त्वचा पर जल्दी जम जाते हैं। इसलिए नारियल तेल लगाने से पहले चेहरा और त्वचा को अच्छे से साफ करना जरूरी है। इससे पोर्स खुले रहते हैं और बैक्टीरिया या फंगस से होने वाले इंफेक्शन की संभावना कम होती है।

मानसून में नारियल तेल के फायदे

1. प्राकृतिक एंटीसेप्टिक


नारियल तेल में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो मानसून में स्किन पर पनपने वाले बैक्टीरिया, यीस्ट और फंगस से लड़ने में मदद करते हैं। बरसात के मौसम में लगातार नमी और पसीना होने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर पैरों, अंडरआर्म्स और स्कैल्प पर। नियमित रूप से नारियल तेल की हल्की मालिश करने से त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बन जाती है, जो हानिकारक माइक्रोऑर्गैनिज़्म को पनपने से रोकती है।

2. मॉइस्चराइजिंग एजेंट

मानसून में कई बार त्वचा नमी के बावजूद अंदर से ड्राई हो सकती है, खासकर जब हम लगातार बारिश के पानी, साबुन या हैंडवॉश के संपर्क में रहते हैं। नारियल तेल में मौजूद हेल्दी फैटी एसिड्स स्किन को गहराई से पोषण देकर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखते हैं। यह त्वचा में नमी को लॉक करता है, जिससे स्किन सॉफ्ट, स्मूद और फ्लेकीनेस से मुक्त रहती है। खासकर एल्बोज़, नीज़ और हील्स जैसे रूखे हिस्सों पर यह बेहद असरदार है।

3. स्किन रिपेयर

नारियल तेल में मौजूद लॉरिक एसिड और विटामिन E स्किन सेल्स की मरम्मत और रिजनरेशन में मदद करते हैं। मानसून में धूल, प्रदूषण और लगातार गीले रहने के कारण त्वचा की बाहरी परत डैमेज हो सकती है। नारियल तेल इन डैमेज्ड सेल्स को रिपेयर करने के साथ-साथ स्किन की इलास्टिसिटी बनाए रखने में भी मदद करता है। यह छोटे कट्स, खरोंच और स्किन इरिटेशन में भी हीलिंग एजेंट की तरह काम करता है।
सावधानियां जो ज़रूर अपनाएं

1. ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन पर सावधानी

अगर आपकी स्किन ऑयली है या पहले से ही पिंपल्स और एक्ने की समस्या है, तो नारियल तेल का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करें। यह कुछ लोगों की स्किन में रोमछिद्र (pores) को ब्लॉक कर सकता है, जिससे ब्रेकआउट बढ़ सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इसे सिर्फ ड्राई एरियाज़ पर लगाएं और चेहरे पर लगाने से बचें।

2. पैच टेस्ट करना न भूलें

जैसे किसी भी नए स्किनकेयर प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूरी होता है, वैसे ही नारियल तेल के लिए भी यह नियम लागू होता है। स्किन के एक छोटे हिस्से पर तेल लगाकर 24 घंटे इंतजार करें। अगर लालिमा, खुजली या जलन महसूस हो, तो इसका इस्तेमाल न करें।

3. भारी मात्रा में तेल लगाने से बचें

मानसून में हवा में पहले से ही काफी नमी होती है, ऐसे में ज्यादा तेल लगाने से त्वचा पर चिकनाहट बढ़ जाती है और धूल-मिट्टी आसानी से चिपकने लगती है। इससे इंफेक्शन, एलर्जी या पसीने की बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हमेशा हल्की परत में ही तेल लगाएं और रात को सोने से पहले इस्तेमाल करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।