अंतिम यात्रा के दौरान ही क्यों कहा जाता है ‘राम नाम सत्य है’? जानें इस परंपरा का रहस्य

मृत्यु जीवन का वह अटल सत्य है, जिससे कोई भी बच नहीं सकता। जिसने इस संसार में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन इस देह को छोड़ना ही पड़ता है। हिंदू धर्म में जब किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकाली जाती है, तो रास्ते भर लोगों के मुख से एक ही वाक्य गूंजता है— ‘राम नाम सत्य है’।

अक्सर लोग इसे परंपरा मानकर दोहराते हैं, लेकिन इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ छिपा है। आइए जानते हैं कि आखिर शव यात्रा के दौरान ही यह वाक्य क्यों बोला जाता है।

क्यों दोहराया जाता है ‘राम नाम सत्य है’

शव यात्रा में ‘राम नाम सत्य है’ का उच्चारण जीवन की क्षणभंगुरता और ईश्वर की शाश्वत सत्ता का प्रतीक माना जाता है। इसका भाव यह है कि इस नश्वर संसार में केवल परमात्मा का नाम ही सत्य है, जो आत्मा को मृत्यु के बाद भी मार्ग दिखाता है।

धन, पद, संबंध और शरीर—सब कुछ यहीं छूट जाता है। केवल ईश्वर का स्मरण ही आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है। यह उद्घोष न सिर्फ दिवंगत आत्मा के लिए कल्याण की कामना करता है, बल्कि शव यात्रा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को यह स्मरण भी कराता है कि जीवन अस्थायी है और मृत्यु अवश्यंभावी।

शास्त्रों से समझिए ‘राम नाम’ की महिमा

1. महाभारत का यक्ष-युधिष्ठिर संवाद

“अहन्यहनि भूतानि गच्छंति यमममन्दिरम्।
शेषा विभूतिमिच्छंति किमाश्चर्य मतः परम्॥”

महाभारत के इस प्रसिद्ध श्लोक में कहा गया है कि प्रतिदिन असंख्य जीव यमलोक को प्रस्थान करते हैं, फिर भी जो जीवित हैं, वे धन, वैभव और अमरता की आकांक्षा में लगे रहते हैं। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?

यह श्लोक मनुष्य को यह सिखाता है कि संसार की हर वस्तु नश्वर है। केवल ईश्वर का नाम ही स्थायी और सत्य है। शव यात्रा के दौरान ‘राम नाम सत्य है’ का उच्चारण इसी सत्य को बार-बार स्मरण कराता है कि अंत में सब कुछ यहीं रह जाएगा।

2. रुद्रयामल तंत्र में वर्णित रहस्य

“शिवे शिवे न संचारो भवत प्रेतस्य कस्यचित।
अतसिद्धाहपर्यंतं राम नाम जपो वरम्॥”

रुद्रयामल तंत्र के अनुसार, जब तक मृत शरीर का दाह संस्कार न हो जाए, तब तक ‘राम’ नाम का जप करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह पवित्र नाम नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है और आत्मा को शांति प्रदान करता है।

इसी विश्वास के चलते शव यात्रा में लगातार ‘राम नाम सत्य है’ बोला जाता है, ताकि आत्मा निर्भय होकर अपने अगले पड़ाव की ओर अग्रसर हो सके।

3. आनंद रामायण में राम मंत्र की शक्ति

“श्रीशब्दमाद्यं जयशब्दमध्यं
जयद्वयेनापि पुनःप्रयुक्तम्।
अनेनैव च मन्त्रेण
जपः कार्यः सुमेधसा॥”

आनंद रामायण में ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ मंत्र की महिमा का वर्णन किया गया है। इस श्लोक के अनुसार, विवेकशील व्यक्ति को इसी मंत्र का जप करना चाहिए, क्योंकि यह अत्यंत प्रभावशाली है।

यह मंत्र न केवल सांसारिक कष्टों को दूर करता है, बल्कि आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने वाला मार्ग भी प्रशस्त करता है। यही कारण है कि शव यात्रा के समय राम नाम का उच्चारण सर्वोत्तम माना गया है।