भारत में नवरात्रि का पर्व आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। हर साल शारदीय नवरात्रि बड़े उत्साह और धार्मिक जोश के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह महापर्व 22 सितंबर से प्रारंभ होगा। इन नौ दिनों तक भक्त माता दुर्गा और उनके विभिन्न स्वरूपों की आराधना, भजन-कीर्तन और साधना में डूबे रहते हैं।
लेकिन नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का नाम नहीं है। सनातन परंपरा के अनुसार कुछ अनुशासन और नियमों का पालन उतना ही जरूरी है जितना कि मंत्र और स्तुति। इन्हीं नियमों के पालन से साधना पूर्ण होती है और माता का आशीर्वाद सहजता से प्राप्त होता है। आइए जानते हैं नवरात्रि में मानने योग्य 7 खास नियमों के बारे में—
1. निश्चित समय पर पूजा-अर्चनामाना जाता है कि देवी मां की पूजा प्रतिदिन एक तय समय पर की जानी चाहिए। नियमितता से साधक का मन और आत्मा शुद्ध रहते हैं और आराधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
2. आहार में केवल सात्विकतानवरात्रि में भोजन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नौ दिनों तक केवल सात्विक और शाकाहारी आहार करना चाहिए। मांसाहार, नशा और तामसिक भोजन वर्जित है। कई भक्त इस दौरान संयम और ब्रह्मचर्य का भी पालन करते हैं।
3. अखंड ज्योति को प्रज्वलित रखेंयदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो यह नौ दिनों तक निरंतर जलनी चाहिए। धार्मिक विश्वास है कि दीपक बुझना अशुभ संकेत माना जाता है और पूजा की सफलता को प्रभावित कर सकता है।
4. दिनानुसार देवी को अर्पित करें भोगनवरात्रि के हर दिन माता दुर्गा के एक विशेष रूप की आराधना होती है। उस दिन की देवी को उनके प्रिय फूल और भोग अर्पित करना चाहिए। इससे पूजा का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।
5. कन्या पूजन का महत्वनवरात्रि के दौरान कन्या पूजन अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त या तो प्रतिदिन एक कन्या का पूजन करते हैं या फिर अष्टमी और नवमी को नौ कन्याओं को सामूहिक रूप से आमंत्रित करके पूजन और भोजन कराते हैं। कन्याओं को विदा करते समय उनका आदर और दान अवश्य करना चाहिए।
6. नाखून और बाल काटने से बचेंपरंपरा के अनुसार नवरात्रि में बाल और नाखून नहीं काटे जाते। महिलाएं खुले बालों के साथ पूजा न करें और पूजा-अर्चना के समय सिर ढककर बैठें। पुरुषों को भी इस नियम का पालन करना चाहिए।
7. कलश स्थापना के बाद घर खाली न छोड़ेंयदि घर में कलश की स्थापना की गई है, तो नौ दिनों तक घर खाली न रखना शुभ माना जाता है। कलश स्थापना को पवित्रता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उसकी देखभाल अनिवार्य है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।