सनातन परंपरा में चंद्र ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय और आध्यात्मिक घटना माना गया है। मान्यता है कि चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि को ही घटित होता है। इस दौरान राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में संवेदनशील समय माना गया है। इसलिए विद्वान इस अवधि में शुभ कार्यों से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। साथ ही ग्रहण काल में भोजन न करने और सात्विक आचरण अपनाने की भी परंपरा है। नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए भगवान शिव और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। चूंकि यह भारत में दृश्य होगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य रहेगा। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या ग्रहण के कारण होलिका दहन और होली की तिथि में कोई परिवर्तन होगा? आइए विस्तार से जानते हैं ग्रहण और सूतक का समय।
ग्रहण कैसे लगता है?धार्मिक मान्यता के अनुसार जब राहु सूर्य को और केतु चंद्रमा को ग्रास करते हैं, तब ग्रहण की स्थिति बनती है। अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होता है। यदि ग्रहण किसी स्थान विशेष पर दिखाई देता है, तो वहां सूतक काल प्रभावी माना जाता है। लेकिन जहां यह दिखाई नहीं देता, वहां सूतक का प्रभाव नहीं माना जाता। ग्रहण काल में शास्त्रों द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना शुभ समझा जाता है।
सूतक काल का समयवर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार, 03 मार्च को पड़ेगा और यह भारत में दिखाई देगा। इस कारण सूतक काल मान्य रहेगा। सामान्य लोगों के लिए सूतक सुबह 09 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगा। वहीं, वृद्धजन, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से प्रभावी माना जाएगा। सूतक और ग्रहण दोनों का समापन शाम 06 बजकर 46 मिनट पर होगा।
चंद्र ग्रहण का सटीक समयज्योतिषीय गणना के अनुसार 03 मार्च को चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर आरंभ होगा। शाम 05 बजकर 04 मिनट पर यह पूर्ण अवस्था में पहुंचेगा। इसके बाद शाम 06 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 46 मिनट तक यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। कुल मिलाकर भारत में यह ग्रहण लगभग 20 मिनट तक दृश्य रहेगा।
ग्रहण की प्रमुख घड़ियांचंद्र ग्रहण की शुरुआत – दोपहर 03:20 बजे
पूर्ण चंद्र ग्रहण – शाम 05:04 बजे
चंद्र ग्रहण का समापन – शाम 06:46 बजे
ग्रहण के भारत में दिखाई देने के कारण सूतक काल का पालन किया जाएगा। हालांकि होलिका दहन की तिथि में परिवर्तन को लेकर अंतिम निर्णय पंचांग और स्थानीय ज्योतिषीय गणना के आधार पर तय होगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को आधिकारिक पंचांग और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही अनुष्ठान करना चाहिए।