सावन में अपनाएं ये वास्तु नियम, शिवजी की कृपा बरसेगी जीवन भर

सावन का महीना केवल वर्षा का नहीं, बल्कि आत्मिक वर्षा का भी काल होता है — यह वह समय है जब भगवान शिव की आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि आप सच में भोलेनाथ की कृपा चाहते हैं, तो उनके साथ-साथ वास्तु शास्त्र के सरल लेकिन प्रभावशाली नियमों का पालन करना अत्यंत लाभकारी हो सकता है। आइए, जानते हैं कि कैसे सावन में वास्तु के नियमों का पालन कर आप अपने जीवन को आनंद, शांति और शिवमय बना सकते हैं।

घर की स्वच्छता — सकारात्मक ऊर्जा का पहला कदम

सावन में अपने घर को मंदिर की तरह शुद्ध और स्वच्छ बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। खासतौर पर पूजा स्थल और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की सफाई रोज़ाना करें। यह स्थान भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यहां गंगाजल मिला जल छिड़कें, और रोज़ कपूर जलाएं। यह वातावरण को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करता है और मानसिक शांति देता है।

पूजा स्थल का वास्तु — जहाँ शिव निवास करते हैं

वास्तु शास्त्र कहता है कि पूजा स्थल उत्तर-पूर्व में होना चाहिए। सावन में इस दिशा में शिवलिंग या शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। यह स्थान साफ-सुथरा और सुगंधित होना चाहिए। ध्यान रखें कि पूजा स्थल के पास भारी सामान या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण न रखें। बेलपत्र, दूध और गंगाजल अर्पित करें — यही सरल उपाय आपके मन की मुरादें पूरी कर सकते हैं।

जल और गंगाजल — शिव को प्रिय और पवित्र


भगवान शिव को जल सबसे प्रिय है। इसलिए सावन में ईशान कोण में एक कलश में गंगाजल भरकर रखें या छोटा फव्वारा भी लगाएं। हर सुबह गंगाजल का छिड़काव करें — यह न केवल घर को पवित्र बनाता है बल्कि मन को भी शीतलता देता है। साथ ही शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

रंग और प्रकाश — घर में बढ़ाएं पवित्रता की आभा

घर की दीवारों पर हल्के रंग जैसे सफेद, हल्का नीला या हरा पेंट करवाएं। ये रंग मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के संवाहक होते हैं। पूजा स्थल पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करें और रात में शिवलिंग के पास दीपक जलाना न भूलें — यह भक्ति का सरल लेकिन प्रभावी तरीका है।

सावन और पौधे — प्रकृति से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर

सावन में तुलसी, बेलपत्र और शमी जैसे पौधों को लगाना शुभ होता है। इन्हें उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाएं। बेलपत्र विशेष रूप से भगवान शिव को प्रिय है — इसे नियमित जल दें और पूजा करें। इससे न केवल धार्मिक लाभ मिलता है बल्कि वातावरण भी स्वच्छ और ऊर्जावान रहता है।

वास्तु दोष निवारण — शिव की कृपा से हटाएं बाधाएं

यदि घर में कोई वास्तु दोष है, तो सावन में इसे दूर करना और भी प्रभावी होता है। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाएं, और ईशान कोण में एक छोटा शिवलिंग स्थापित करें। घर में रुद्राक्ष की माला या यंत्र रखें, जिससे घर का वातावरण और अधिक सकारात्मक बनता है।

वास्तु संतुलन और भक्ति — जीवन में लाएं दिव्यता

वास्तु संतुलन तभी आता है जब घर में प्रेम और सात्विकता हो। रोज सुबह-शाम शिवलिंग पर जल अर्पित करें, सात्विक भोजन बनाएं और परिवार में प्रेम बनाए रखें। रसोईघर को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें और दान-पुण्य जरूर करें। किसी ज़रूरतमंद की मदद करें — क्योंकि यही है सच्ची भक्ति और यही है भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।