पूजा से जुड़े कुछ नियम जिनका पालन लाता है जीवन में शांति

हिन्दू धर्म में पूजा का बहुत बड़ा महत्व हैं। घर में पूजा करने से मन को शांति के साथ-साथ घर का वातावरण भी शुभ हो जाता हैं। लेकिन अगर आप रोज पूजा करते हैं फिर भी आपका मन स्थिर नहीं रह पाता, तो इसके पीछे पूजा से जुड़े कुछ कारण हो सकते हैं, जैसे कहीं आप पूजा करने में कोई गलती कर रहें हो । पूजा करने के कुछ नियम होते हैं, अगर उन नियमों का उलंघ्घन किया जाए तो ये अशुभ फल प्रदान करती हैं। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं पूजा से जुड़े कुछ नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप अपे जीवन में शांति ला सकते हैं। तो आइये जानते हैं उन नियमों के बारे में।

* शिवजी, गणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।

* किसी भी मनोकामना के पूर्ण होने पर दक्षिणा अवश्य चढ़ाएं।

* कभी भी स्टील के बर्तनों का पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि धार्मिक कार्यों में स्टील को अशुद्ध माना गया है।

* रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

* बिना नहाए तुलसी के पत्तों को हाथ नहीं लगाना चाहिए। यदि कोई पूजा से पूर्व तुलसी के पत्तों को शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है भगवान पूजा नहीं स्वीकार करते।

* केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

* घर में पूजा करते हुए सुबह-शाम दोनों पहर दीपक जलाना चाहिए। और शनिवार के दिन एक दीपक घी का और दूसरा शनिदेव के नाम से सरसों के तेल का जलाना चाहिए।

* माना जाता है कि बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

* मां लक्ष्मी को विशेष रूप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है। इस फूल को पांच दिनों तक जल छिड़क कर पुन: चढ़ा सकते हैं।

* एल्युमिनियम से बने बर्तन में कभी भी गंगाजल नहीं रखना चाहिए क्योंकि वह अपवित्र माने जाते हैं। गंगाजल को तांबे के बर्तन में रखना ही शुभ रहता है।

* सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है।