बार-बार खाने में बाल मिलना सिर्फ संयोग नहीं, ये संकेत हो सकते हैं खराब राहु और पितृ दोष के – जानिए इससे जुड़ी अहम बातें

हमारे आसपास कई बार ऐसी-ऐसी छोटी-मोटी चीजें होती हैं जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। मगर ज़िंदगी में कुछ इशारे ऐसे भी होते हैं जो हमें वक्त रहते चेतावनी देने आते हैं — बस ज़रूरत है उन्हें समझने की। इन्हीं में से एक है खाने में बार-बार बाल का मिलना। कई बार ये देखकर हम या तो चिढ़ जाते हैं या फिर बेमन से उस खाने को छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये बार-बार बाल मिलना एक सामान्य गलती नहीं, बल्कि एक ज्योतिषीय संकेत भी हो सकता है?

खराब राहु के संकेत, जो नजरअंदाज नहीं किए जाने चाहिए


अगर कोई व्यक्ति खाना शुरू करते ही अपनी थाली में बाल देखता है और ऐसा कभी-कभार होता है, तो हो सकता है वो महज संयोग हो। लेकिन जब ये घटना बार-बार होने लगे, तो यह एक गंभीर इशारा हो सकता है। माना जाता है कि जिस व्यक्ति के भोजन में बार-बार बाल मिले, उसके ऊपर राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ रहा होता है। और ये राहु जब अशुभ होता है, तो जीवन में कई अड़चनें, भ्रम, और अनिश्चितता लेकर आता है।

राहु क्या करता है और क्यों इससे डरते हैं लोग?

‘राहु’ का नाम सुनते ही अधिकतर लोग असहज हो जाते हैं, क्योंकि इसके बारे में हमेशा डराने वाली बातें सुनी हैं। लेकिन सच यह है कि राहु अगर कुंडली में शुभ स्थान पर है, तो व्यक्ति को अपार प्रसिद्धि और सफलता मिल सकती है। वहीं अगर राहु खराब स्थिति में बैठा हो, तो इंसान का जीवन उतार-चढ़ावों से भर जाता है। सोचिए, आप मेहनत कर रहे हैं, पर परिणाम नकारात्मक मिल रहे हैं — ये राहु का प्रभाव हो सकता है। इस स्थिति में पैसों का बहाव भी डगमगा जाता है और रिश्तों में खटास आने लगती है।

क्या खाने में बाल मिलना पितृ दोष का भी इशारा है?

ज्योतिष शास्त्र कहता है कि यदि बार-बार खाना खाते वक्त उसमें बाल दिखाई दे रहा है, तो यह पितृ दोष का संकेत भी हो सकता है। यानी पूर्वजों से जुड़ी कोई अधूरी इच्छा या कर्ज, जो आपकी कुंडली में दोष के रूप में मौजूद है। पितृ दोष होने पर व्यक्ति की सेहत प्रभावित हो सकती है, पारिवारिक सुख में रुकावटें आ सकती हैं, और कामों में देरी का सिलसिला चल सकता है।

क्या करें ऐसे संकेत मिलने पर?


ऐसे में राहु या पितृ दोष से बचाव के लिए ज्योतिषीय उपाय शुरू करें — लेकिन अपनी राशि और कुंडली के अनुसार। इसके साथ ही, जिस भोजन में बाल मिले, उसे खुद न खाएं बल्कि पशु-पक्षियों को खिला दें। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से सही है, बल्कि प्रकृति के साथ आपके जुड़ाव को भी दर्शाता है।