Diwali 2025: 20 अक्टूबर को क्यों है दीपावली पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त, जानिए किनसे रूठ जाती हैं मां लक्ष्मी

इस साल 2025 में दीपावली कब मनाई जाएगी, इस पर देशभर में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 21 अक्टूबर को मान रहे हैं, लेकिन ज्योतिष और पंचांग शास्त्र के अनुसार दीपावली 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाना पूर्णत: उचित है।

हिंदू धर्म के अनुसार दीपावली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर 2:32 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दिन में 4:25 बजे तक रहेगी। ऐसे में पूरी अमावस्या रात्रि 20 तारीख को मिल रही है, जो दीपावली पूजन के लिए आदर्श मानी जाती है।

विशेष यह है कि 20 अक्टूबर को ही प्रदोष काल, निशीथ काल और महा निशीथ काल — तीनों शुभ काल का संयोग मिल रहा है, जो इस दिन को दीपावली पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ बनाता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का समन्वय होता है और यहीं दीप प्रज्वलन व लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ समय होता है।

दीपावली पर बन रहे हैं विशेष ग्रह योग

इस वर्ष दीपावली पर ग्रहों की जो विशेष स्थितियाँ बन रही हैं, वे इस पर्व को और अधिक प्रभावशाली एवं शुभ बना रही हैं। पंचांग के अनुसार इस बार चंद्रमा कन्या राशि में शुक्र के साथ स्थित रहेगा, जो मानसिक संतुलन और भौतिक सुखों का संकेतक है। साथ ही बुध तुला राशि में रहकर बुधादित्य योग का निर्माण करेगा, जो बुद्धिमत्ता और व्यापार में सफलता का योग है। मंगल और सूर्य भी तुला में रहकर भौमादित्य योग बनाएंगे, जो साहस और नेतृत्व की शक्ति को दर्शाता है। गुरु ग्रह अमावस्या की रात के बाद अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेगा, जो धर्म और आध्यात्मिक ऊर्जा को बल प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त शनि मीन राशि में, राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में गोचर करेंगे, जिससे तांत्रिक क्रियाओं और साधना में रुचि रखने वालों के लिए यह काल विशेष फलदायक रहेगा। इन सभी ग्रह योगों के कारण यह दीपावली विशेष रूप से व्यापार, धन-लाभ और साधना के क्षेत्र में अत्यंत शुभ मानी जा रही है।

इन ग्रह योगों के कारण यह दीपावली अत्यंत फलदायक मानी जा रही है, खासकर व्यापार, धन, और तांत्रिक साधना के इच्छुक लोगों के लिए।

कब करें दीप प्रज्वलन और लक्ष्मी पूजन?

अब यदि बात करें लक्ष्मी पूजन और दीप प्रज्वलन के मुहूर्त की, तो 20 अक्टूबर, सोमवार को इसके लिए कई श्रेष्ठ समय उपलब्ध हैं। सायं 5:30 से 6:10 बजे तक शुभ चौघड़िया प्राप्त हो रहा है, जो दीप प्रज्वलन के लिए अत्यंत अनुकूल है। इसके बाद सायं 6:51 से 8:48 बजे तक वृष लग्न में स्थिर पूजन मुहूर्त प्राप्त हो रहा है, जो प्रदोष काल से युक्त है और गृहस्थों तथा व्यापारियों के लिए विशेष शुभ माना जाता है। रात्रि में 1:35 से 3:10 बजे तक महा निशीथ काल के दौरान तांत्रिक पूजन एवं काली पूजा के लिए श्रेष्ठ समय रहेगा। इस समय के दौरान स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया का संयोग साधना एवं आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए अनुकूल रहेगा। अतः लक्ष्मी, गणेश और कुबेर के पूजन के लिए प्रदोष काल में दीप प्रज्वलन करना सर्वश्रेष्ठ फलदायी होगा।

किससे रूठ जाती हैं मां लक्ष्मी?

शास्त्रों के अनुसार, दीपावली पर केवल विधि-विधान से पूजन ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अपने व्यवहार और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। कुछ आदतें ऐसी होती हैं, जिनसे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और ऐसे घरों से विमुख हो जाती हैं। जैसे जो व्यक्ति गंदे वस्त्र पहनते हैं, नियमित दंतमंजन नहीं करते और जिनके दांत गंदे रहते हैं, वे लक्ष्मी की कृपा से वंचित रहते हैं। जो लोग कटु वचन बोलते हैं, रूखा व्यवहार करते हैं, अति भोजन करते हैं या फिर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोते हैं, उनके घर में लक्ष्मी नहीं ठहरती। दीपावली जैसे पवित्र अवसर पर यह आवश्यक है कि व्यक्ति न केवल घर की साफ-सफाई करे, बल्कि अपने आचरण, वाणी और विचारों को भी पवित्र बनाए। संयमित जीवनशैली, मधुर वाणी, और आंतरिक स्वच्छता से ही लक्ष्मी का स्थायी वास संभव होता है।

दीपावली केवल पूजन नहीं, आत्मशुद्धि का पर्व है

धन की देवी लक्ष्मी का पूजन केवल दीप जलाकर और मिठाइयाँ चढ़ाकर नहीं होता, बल्कि स्वयं के व्यवहार, शरीर और विचारों की पवित्रता से होता है। इसलिए दीपावली के दिन केवल घर नहीं, अपने मन को भी प्रकाशित करना ज़रूरी है।

यदि आप 20 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजन करते हैं, तो न केवल शास्त्र सम्मत रूप से सही समय पर पूजा करेंगे, बल्कि ग्रह योग और मुहूर्तों का अधिकतम लाभ भी प्राप्त करेंगे।

इसलिए यह स्पष्ट है: दीपावली का सही दिन 20 अक्टूबर है — और यही समय है माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का।