दीपावली 2025: लक्ष्मी पूजन का रहस्य, केवल धन नहीं, विवेक की देवी भी हैं मां लक्ष्मी

देशभर में आज दीपावली की रौनक छाई हुई है। यह पर्व सिर्फ रोशनी और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दीपावली पर किया जाने वाला लक्ष्मी पूजन केवल धन की प्राप्ति के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य मानव जीवन में सकारात्मकता, शांति, ज्ञान और विवेक के प्रकाश को स्थापित करना भी है। यह हमें याद दिलाता है कि समृद्धि का असली माप केवल संपत्ति से नहीं, बल्कि गुणों, संस्कारों और आंतरिक संतुलन से होता है। वेदों में वर्णित लक्ष्मी केवल सोने-चांदी और धन-संपत्ति की अधिष्ठात्री नहीं हैं। वे भगवान नारायण की प्रिय श्रीनिधि लक्ष्मी हैं, जो शीतलता, विवेक और संतुलन की प्रतीक मानी जाती हैं। लक्ष्मी जी केवल बाहरी धन-संपत्ति ही नहीं, बल्कि गुण, संस्कार, पवित्रता और विवेक की देवी हैं।

दीपक: धरती की बेटी के भाई

दीपावली पर घरों में जलाए जाने वाले दीपक केवल रोशनी का माध्यम नहीं हैं। ये दीपक धरती की बेटी मां जानकी के भाई माने जाते हैं। जब दीपक जलते हैं, तो उनका प्रकाश अंधकार को दूर करता है और आशा व विश्वास का वातावरण बनाता है। यह घरों को रोशनी के साथ-साथ भीतर के नकारात्मक विचार, आलस्य, असत्य और भ्रम को भी दूर करने का संदेश देता है।

पूजा की विधियां और रंगोली का महत्व

दीपावली पर बनाए जाने वाले रंगोली, दीपों की पंक्तियाँ और पूजा की विधियां केवल परंपरा भर नहीं हैं। इन सबमें गहरा अर्थ छिपा है: मन, वाणी और कर्म में एकता स्थापित करना। जब हम अपने घरों को स्वच्छ, व्यवस्थित और प्रकाशित करते हैं, तो हम वास्तव में अपने अंदर के भावों को भी पवित्र करते हैं। यही आंतरिक स्वच्छता और प्रकाश मां लक्ष्मी को आकर्षित करता है।

दीपों की पंक्तियों का संदेश

अमावस्या की रात, जब तारों की रोशनी कम होती है, दीपों की पंक्तियाँ अंधकार को दूर करते हुए दिव्य प्रकाश फैलाती हैं। यह हमें याद दिलाती हैं कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा हो, एक छोटी सी लौ भी उसे मिटाने में सक्षम होती है।