दिवाली के पांच दिवसीय पर्व की रौनक पूरे देश में छा चुकी है। आज इस उत्सव का दूसरा दिन यानी छोटी दिवाली मनाई जा रही है, जिसे नरक चतुर्दशी, काली चौदस या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से यमराज और हनुमान जी की आराधना का महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि छोटी दिवाली की रात दीपदान और पूजा करने से समस्त पाप और दुःखों से मुक्ति मिलती है।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए नरक चतुर्दशी के दिन उनकी विशेष पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति, साहस और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अगर इस दिन श्रद्धा से बजरंगबली के समक्ष दीपक जलाया जाए तो जीवन की सभी बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं।
आइए जानते हैं, छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी के लिए किन दीपकों का विशेष महत्व बताया गया है—
सरसों के तेल का दीपकनरक चतुर्दशी की रात जब आप बजरंगबली की पूजा करें, तो सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि यह दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है। इससे व्यक्ति को आत्मबल और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
आटे का दीपकहनुमान जी की आराधना के दौरान आटे से बना दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। इसमें चमेली के तेल का उपयोग करें। ऐसा करने से हनुमान जी शनि दोष और ग्रह पीड़ा को शांत करते हैं। जो लोग लंबे समय से जीवन में रुकावटें महसूस कर रहे हैं, उन्हें यह उपाय अवश्य अपनाना चाहिए।
चौमुखी दीपकछोटी दिवाली के दिन हनुमान जी के सामने चौमुखी दीपक जलाने का विशेष महत्व है। इसे देशी घी या सरसों के तेल से जलाकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखें। ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
हनुमान जी की पूजा का शुभ मुहूर्त (Chhoti Diwali 2025 Hanuman Ji Puja Muhurat)हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की तिथि 19 अक्तूबर दोपहर 1:51 बजे आरंभ होगी और 20 अक्तूबर दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी। पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय 19 अक्तूबर की रात 11:41 बजे से लेकर 20 अक्तूबर की मध्यरात्रि 12:31 बजे तक रहेगा। इसी काल में हनुमान जी की पूजा-आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।