रॉयटर्स, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर उनके कड़े आव्रजन और दमन नीतियों के खिलाफ पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। मंगलवार को हजारों लोग—श्रमिक, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता—शहरों, कॉलेज कैंपसों और छोटे कस्बों में सड़कों पर उतरे। विरोध की तीव्रता विशेष रूप से मिनियापोलिस में तब बढ़ी जब संघीय एजेंटों ने अमेरिकी नागरिक रेनी गुड को गोली मार दी और एक अन्य मामले में एक नागरिक को कार से खींचकर बाहर निकाला।
मिनियापोलिस हत्याकांड ने बढ़ाई आग7 जनवरी 2026 को आईसीई एजेंट जोनाथन रॉस ने 37 वर्षीय मां रेनी निकोल गुड को उनकी कार में गोली मार दी। संघीय अधिकारियों का दावा है कि गुड ने एजेंट को कार से कुचलने की कोशिश की थी, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों, मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे और गवर्नर टिम वाल्ज ने इस कार्रवाई को लापरवाह और अनुचित बल प्रयोग करार दिया।
इस घटना के बाद ऑपरेशन मेट्रो सर्ज के तहत 2,000 से अधिक संघीय एजेंट तैनात किए गए, जिससे हजारों गिरफ्तारियां हुईं और प्रदर्शन हिंसक रूप ले गए। राष्ट्रपति ट्रंप ने रेनी गुड को घरेलू आतंकवादी करार दिया और इंसरेक्शन एक्ट लागू करने की धमकी दी।
देशभर में विरोध की लहरवाशिंगटन डीसी और उत्तरी कैरोलिना के ऐशविले जैसे छोटे शहरों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो में प्रदर्शनकारी ना आईसीई, ना केकेके, ना फासीवादी अमेरिका के नारे लगाते दिखे। न्यूयॉर्क, लॉस एंजेल्स, शिकागो, पोर्टलैंड और अन्य शहरों में छात्रों ने कैंपस वॉकआउट किए, जिनमें कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं।
ट्रंप प्रशासन का रुख और जनमतट्रंप प्रशासन का कहना है कि जनता ने अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने का जनादेश उन्हें दिया है। हाल के सर्वेक्षण (जैसे रॉयटर्स/इप्सोस और वाशिंगटन पोस्ट) दर्शाते हैं कि अधिकांश अमेरिकी आईसीई के बल प्रयोग के विरोध में हैं, जबकि रिपब्लिकन वोटरों में भी मतभेद देखे गए हैं।
प्रशासन ने 75 देशों से इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग रोक दी है और आईसीई का बजट बढ़ाकर 28.7 बिलियन डॉलर कर दिया है। इस कदम को आलोचकों ने अत्यधिक और विभाजनकारी बताया है, जबकि समर्थक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून का पालन करार देते हैं।