मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आग में झुलसता दिखाई दे रहा है। पहले से बेहद नाजुक बने हालात अब और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के सख्त और आक्रामक रुख के बाद अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और शांति की बची-खुची उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया है।
यह सैन्य कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई है, जिसमें ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया गया था। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच पिछले लगभग दो महीनों से चल रहा अस्थिर और बेहद संवेदनशील युद्धविराम अब पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हालात इतने तेजी से बदले हैं कि कूटनीतिक हलकों में भी चिंता की लहर दौड़ गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का बयान, “आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई”अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि कमांडर-इन-चीफ राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी बलों ने शाम करीब 5 बजे (स्थानीय समय) ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की।
सेंटकॉम के अनुसार, यह कदम उस घटना के प्रतिशोध में लिया गया है जिसमें अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था। बयान में यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई “आनुपातिक प्रतिक्रिया” के तहत की गई है ताकि ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों का जवाब दिया जा सके और अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ईरान के कई क्षेत्रों में धमाकों की गूंज, तनावपूर्ण माहौलईरान की आधिकारिक मीडिया एजेंसियों मेहर और फार्स ने बताया कि अमेरिकी हमलों के बाद देश के दक्षिणी हिस्सों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। खासकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉरमोजगान प्रांत में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कूहेस्ताक, सिरीक, मीनाब और बंदर अब्बास जैसे तटीय शहरों में लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन हमलों में कितना नुकसान हुआ है और किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया है। क्षेत्र में संचार और सूचना व्यवस्था भी प्रभावित बताई जा रही है।
अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर कैसे हुआ हादसे का शिकार?इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नियमित गश्त पर था। रॉयटर्स से बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान द्वारा छोड़े गए एक आत्मघाती ड्रोन ने हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया, जिसके बाद वह क्रैश हो गया।
Donald Trump ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हमला उस समय हुआ जब अत्याधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सामान्य निगरानी मिशन पर था। उनके अनुसार यह सीधा हमला था जिसने स्थिति को अचानक बेहद गंभीर बना दिया।
अमेरिकी सेना ने यह भी जानकारी दी कि घटना मंगलवार सुबह लगभग 3 बजे के आसपास हुई थी। राहत की बात यह रही कि एक असाधारण और आधुनिक बचाव अभियान में समुद्री ड्रोन की मदद से हेलीकॉप्टर के दोनों क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उन्हें निगरानी में रखा गया है।
पहली बार समुद्री ड्रोन से रेस्क्यू ऑपरेशन की चर्चाइस घटना ने एक नई सैन्य तकनीक और बचाव प्रणाली की ओर भी ध्यान खींचा है। अमेरिकी सेना के अनुसार यह पहली बार है जब समुद्री ड्रोन की मदद से इस तरह का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया है। इसे सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान का जवाब और सफाई, “जानबूझकर हमला नहीं किया”तनाव बढ़ने के बीच ईरान की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका के तटों से हजारों किलोमीटर दूर है और वहां विदेशी सेनाओं की मौजूदगी लगातार जोखिम पैदा करती है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य बल हमेशा तकनीकी गलती, दुर्घटना या क्रॉसफायर जैसी परिस्थितियों के खतरे में रहते हैं। उनके अनुसार सबसे बेहतर विकल्प यही होगा कि विदेशी सेनाएं इस संवेदनशील क्षेत्र से दूरी बनाए रखें ताकि किसी बड़े टकराव को रोका जा सके।
वहीं उप-विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अल जजीरा से बातचीत में स्थिति को संतुलित करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर हुआ हमला जानबूझकर नहीं किया गया था और इसे किसी नियोजित सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दो महीने पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर, क्षेत्र में बढ़ता खतराइस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की पहले से जटिल भू-राजनीतिक स्थिति को और ज्यादा अस्थिर कर दिया है। अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने और उसके बाद अमेरिकी जवाबी हमलों ने यह साफ कर दिया है कि तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।
यह संकट ऐसे समय पर गहराया है जब ईरान और इजरायल के बीच भी हाल ही में संघर्ष विराम के बाद पहली बार सीधे हमले और मिसाइलों का आदान-प्रदान हुआ था। लगातार बदलते हालात ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर बड़े युद्ध के बेहद करीब ला खड़ा किया है, जहां किसी भी छोटी घटना का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।