पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान भारत के खिलाफ कई आरोप लगाए। उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सिंधु जल संधि और नदी के पानी का मुद्दा भी उठाया। शहबाज शरीफ ने भारत पर पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि नदियों को देशों को जोड़ना चाहिए, बांटना नहीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत को युद्ध की चेतावनी भी दी।
शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तान के दावों का जवाब दिया। भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के राजनीतिक और आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए उसके दावों पर सवाल उठाए। जवाब में पाकिस्तान के 2024 के आम चुनाव से जुड़े फॉर्म-47 विवाद का भी जिक्र किया गया।
शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा उठायासंयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान शहबाज शरीफ ने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत पर सिंधु नदी के पानी को लेकर दबाव बनाने और पानी को ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
शहबाज ने कहा कि नदियों का इस्तेमाल देशों को जोड़ने के लिए होना चाहिए, उन्हें बांटने के लिए नहीं। इसी दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ कड़े तेवर दिखाते हुए युद्ध की चेतावनी भी दी।
उन्होंने कश्मीर का भी उल्लेख किया और इसे पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे के तौर पर पेश किया। इस तरह उनके भाषण में कश्मीर और सिंधु जल संधि दोनों प्रमुख मुद्दे रहे।
भारत ने राइट टू रिप्लाई में उठाया पाकिस्तान के रिकॉर्ड का मुद्दाशहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के दावों का जवाब दिया। भारतीय अधिकारी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड का उल्लेख किया और 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में रहने का मुद्दा उठाया।
भारत की ओर से पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ ही ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और नफरत से जुड़े मुद्दों को भी पाकिस्तान के रिकॉर्ड के संदर्भ में उठाया गया।
फॉर्म-47 का जिक्र कर पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था पर सवालभारत के जवाब में पाकिस्तान के 2024 के आम चुनाव से जुड़े फॉर्म-47 विवाद का भी उल्लेख किया गया। चुनाव के बाद विपक्षी दलों और उम्मीदवारों ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में शुरुआती नतीजों और बाद में घोषित परिणामों के बीच अंतर होने के आरोप लगाए थे।
इसी विवाद के कारण फॉर्म-47 पाकिस्तान की चुनावी राजनीति में चर्चा का विषय बना। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने जवाब के दौरान इसी मुद्दे का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाया।
पाकिस्तान के जीत के दावे पर भी भारत का जवाबशहबाज शरीफ की ओर से पाकिस्तान की जीत से जुड़े दावों का भी भारतीय पक्ष ने जवाब दिया। पेटल गहलोत ने कहा कि भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस को नुकसान पहुंचने के संबंध में सैटेलाइट तस्वीरें और सबूत मौजूद हैं।
उन्होंने पाकिस्तान के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें उसने खुद को विजेता बताया था। गहलोत के मुताबिक, अगर क्षतिग्रस्त रनवे और जले हुए हैंगर को पाकिस्तान अपनी जीत मानता है, तो वह इस दावे को अपनी तरह से पेश करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना ने सीजफायर की मांग की थी।
ये दावे और उनका जवाब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा रहे।
UN मुख्यालय के बाहर भी शहबाज से हुए सीधे सवालशहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र पहुंचने से पहले और भाषण के अलावा पत्रकारों ने उनसे आतंकवाद को लेकर भी सवाल किए। यूएन मुख्यालय में दाखिल होते समय एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा।
शहबाज शरीफ ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। इसके बाद उनसे हाफिज सईद को लेकर भी सवाल किया गया, लेकिन इस सवाल पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
इस तरह शहबाज शरीफ की संयुक्त राष्ट्र यात्रा के दौरान एक ओर महासभा के मंच पर भारत के खिलाफ कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे उठाए गए, वहीं दूसरी ओर पत्रकारों के सवालों में पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड और हाफिज सईद का मुद्दा सामने आया।