भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल का अमेरिका में जलवा, 88% वोटों के साथ छठी बार बनीं सांसद

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव में उन्होंने वॉशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल जिले से जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) में अपना छठा कार्यकाल शुरू करेंगी। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार नीरव शेठ को बड़े अंतर से हराया। चुनाव के शुरुआती नतीजों में प्रमिला जयपाल को लगभग 88 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी नीरव शेठ को करीब 12 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों में जयपाल को 1,77,700 और शेठ को 24,654 वोट मिले। इस तरह दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर काफी बड़ा रहा। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला हैं। वह इमिग्रेशन, प्रवासी अधिकारों और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन नीतियों की भी वह लगातार आलोचना करती रही हैं।

कौन हैं प्रमिला जयपाल? भारत से अमेरिका तक का सफर

प्रमिला जयपाल का जन्म 21 सितंबर 1965 को भारत के चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। उनका बचपन भारत के अलावा इंडोनेशिया और सिंगापुर में भी बीता। महज 16 साल की उम्र में वह उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अकेले अमेरिका चली गई थीं। वहां उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और बाद में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की। अमेरिका पहुंचने के बाद उनका सफर आसान नहीं रहा। पढ़ाई और करियर के दौरान उन्हें अलग-अलग वीजा प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। वह लंबे समय तक आव्रजन और प्रवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करती रहीं। अमेरिकी नागरिक बनने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और प्रवासियों के अधिकारों की मजबूत आवाज बनकर उभरीं। साल 2015 में वह वॉशिंगटन स्टेट सीनेट की सदस्य चुनी गईं। इसके बाद 2016 में उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता और जनवरी 2017 में कांग्रेस की सदस्य बनीं। अब 2026 के चुनाव में जीत के बाद वह लगातार छठी बार इस पद पर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगी।

अमेरिकी कांग्रेस में संभालती हैं कई अहम जिम्मेदारियां

प्रमिला जयपाल केवल सांसद के तौर पर ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों और राजनीतिक समूहों में अपनी भूमिका के लिए भी जानी जाती हैं। वह हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी की सदस्य हैं और इसकी इमिग्रेशन इंटीग्रिटी, सिक्योरिटी एंड एनफोर्समेंट सब-कमेटी में डेमोक्रेटिक पार्टी की रैंकिंग मेंबर हैं। इसके अलावा वह हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की दक्षिण एवं मध्य एशिया और अफ्रीका से संबंधित उपसमितियों में भी काम करती हैं। हाउस बजट कमेटी में भी उनकी सदस्यता है। प्रगतिशील विचारधारा वाले सांसदों के समूह Congressional Progressive Caucus की वह पहले अध्यक्ष रह चुकी हैं। छह साल तक इस समूह का नेतृत्व करने के बाद अब उन्हें चेयर एमेरिटा का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा वह Congressional Asian Pacific American Caucus की इमिग्रेशन टास्क फोर्स की अध्यक्ष भी हैं।

ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों की करती रही हैं आलोचना

प्रमिला जयपाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन नीतियों की मुखर आलोचक रही हैं। उनका मानना है कि अमेरिका में कानूनी तरीके से आने वाले प्रवासियों के लिए रास्ते सीमित करने से उन लोगों को नुकसान होता है, जो शिक्षा और रोजगार के अवसरों की तलाश में अमेरिका पहुंचते हैं। अपने प्रवासी जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए वह कई बार कह चुकी हैं कि अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और मानवीय बनाया जाना चाहिए। एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों और फीस में बढ़ोतरी के मुद्दे पर भी उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। सितंबर 2026 में व्हाइट हाउस की ओर से जारी घोषणा में अमेरिका के बाहर मौजूद कुछ एच-1बी आवेदकों के लिए 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त रखी गई थी। इस तरह के प्रतिबंधों को लेकर प्रवासी अधिकारों के समर्थकों ने चिंता जताई है।

भारत पर लगाए गए टैरिफ का भी किया विरोध

प्रमिला जयपाल भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। उन्होंने भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ लगाने की नीति की आलोचना की है। उनका तर्क रहा है कि ऐसे शुल्कों से भारत की अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर अमेरिकी कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत और भेदभाव की घटनाओं पर भी उन्होंने चिंता जताई है। उनके मुताबिक, प्रवासियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने से समाज में असमानता बढ़ती है। भारत से अपने भावनात्मक जुड़ाव को लेकर भी वह पहले बयान दे चुकी हैं। साल 2023 में उन्होंने भारत को अपना जन्मस्थान बताया था और कहा था कि उनके माता-पिता आज भी वहीं रहते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि वह अपने जीवन के करीब तीन दशक तक भारत की नागरिक रही थीं।

जेडी वेंस ने भी चुनावी हार के लिए ईरान युद्ध को ठहराया जिम्मेदार

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया। 4 नवंबर को सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि पार्टी को उन मतदाताओं को वापस लाने के लिए ईरान युद्ध समाप्त करने, महंगाई और जीवनयापन की लागत पर ध्यान देने, अमेरिका को प्राथमिकता देने और इजरायल के साथ संबंधों की समीक्षा करने की जरूरत है। वेंस का यह रुख राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से अलग नजर आया। ट्रंप ने ईरान युद्ध के चुनाव पर असर को स्वीकार किया, लेकिन सैन्य कार्रवाई के फैसले का बचाव किया। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में नियंत्रण हासिल किया। प्रमिला जयपाल की जीत भी इसी चुनावी नतीजे का हिस्सा है। उनकी सफलता ने वॉशिंगटन के 7वें जिले में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत स्थिति को फिर से सामने रखा है।