निमिषा प्रिया को यमन में बचाने की एक और उम्मीद अब टूटती नजर आ रही है। यह खबर उन तमाम लोगों के लिए एक भावनात्मक झटका है जो महीनों से उनकी रिहाई के लिए दुआ कर रहे थे। सोमवार को भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बेहद साफ शब्दों में कह दिया कि इस मामले में वे अब ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। आपको बता दें कि निमिषा को 16 जुलाई को यमन में फांसी दी जा सकती है। उन पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है, जिसमें उन्हें दोषी करार दिया गया है।
सरकार ने जताई संवेदना, लेकिन जताई मजबूरीमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने अदालत से कहा, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है… लेकिन एक सीमा है जहां तक हम हस्तक्षेप कर सकते हैं।” इस वक्तव्य से यह साफ हो गया कि भारत सरकार ने जितना संभव था, उतना कर लिया। आगे सरकार की ओर से कहा गया, “अब एक ही रास्ता बचता है कि पीड़ित का परिवार ब्लड मनी स्वीकार करने को तैयार हो जाए।”
ब्लड मनी की व्यवस्था के तहत दोषी की ओर से पीड़ित परिवार को एक तय धनराशि दी जाती है, ताकि वे माफ करने पर विचार कर सकें। हालांकि, यह रकम कितनी होगी, यह दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय होती है।
सरकार की सीमाएं और कूटनीतिक मजबूरियांएटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत सरकार इस मामले में जितना कूटनीतिक और संवैधानिक दायरे में आ सकता था, उतना आ चुकी है। उन्होंने कहा, “यमन की संवेदनशीलता को देखते हुए, हम और आगे नहीं जा सकते। ब्लड मनी एक निजी समझौता है, इसमें सरकार की कोई कानूनी भूमिका नहीं हो सकती।”
भयावह हत्या और कठोर सजाकेरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया को यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने एक अन्य नर्स के साथ मिलकर इस हत्या को अंजाम दिया था। आरोप है कि हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर एक भूमिगत टैंक में फेंक दिया गया था। हालांकि, निमिषा ने पहले कई बार इन आरोपों को चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी सभी अपीलों को खारिज कर दिया।
क्या होता है ब्लड मनी?अगर आसान शब्दों में कहें, तो ब्लड मनी एक तरह का मुआवजा होता है, जो दोषी पक्ष की ओर से पीड़ित परिवार को दिया जाता है। इस्लामिक कानून के अनुसार, पीड़ितों को यह अधिकार होता है कि वे तय करें कि दोषी को माफ किया जाए या सजा दी जाए। कई बार यह व्यवस्था गैर इरादतन हत्या के मामलों में अपनाई जाती है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में भी अगर पीड़ित का परिवार सहमत हो, तो ब्लड मनी के बदले दोषी को फांसी की सजा से राहत मिल सकती है।
अब देखना यह होगा कि क्या निमिषा प्रिया का परिवार अंतिम समय में ब्लड मनी की व्यवस्था से कुछ उम्मीदें जगा पाएगा या फिर 16 जुलाई की तारीख उनके जीवन की अंतिम सांस के रूप में सामने आएगी।