अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों में भारतीय मूल के नेताओं ने अहम कामयाबी हासिल की है। डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। वहीं, सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया के 10वें डिस्ट्रिक्ट से दोबारा सांसद चुने गए हैं। मैरीलैंड में भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने भी गवर्नर वेस मूर के साथ लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के लिए जीत दर्ज की है। इन नतीजों के बीच अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्रतिनिधित्व चर्चा में है। तीनों नेता डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। हालांकि, इनकी जीत अलग-अलग राज्यों और चुनावी क्षेत्रों में हुई है।
पिया डंडिया ने फ्लोरिडा में रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया
पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व मरीन सैनिक केसी अस्कार को मात दी। मंगलवार को मतदान के बाद आए नतीजों में डंडिया की जीत की पुष्टि हुई। इस जीत के साथ वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली भारतीय मूल की नई सदस्य बनी हैं। पिया डंडिया डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं और शिक्षा के क्षेत्र से भी जुड़ी रही हैं। वह पहले हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने कम आय वाले परिवारों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर देने के उद्देश्य से एक हाई स्कूल की स्थापना की थी। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। फ्लोरिडा के इस चुनाव में उनकी जीत को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया से फिर बने सांसदभारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। ताजा नतीजों के अनुसार, सुब्रमण्यम को 63.16 प्रतिशत यानी 1,73,106 वोट मिले, जबकि बेकविथ को 34.66 प्रतिशत यानी 94,990 वोट हासिल हुए। 40 वर्षीय सुब्रमण्यम के माता-पिता भारतीय मूल के हैं। उनकी मां बेंगलुरु से हैं, जबकि उनके पिता चेन्नई और सिकंदराबाद में रहे हैं। उनका जन्म वर्जीनिया में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में व्हाइट हाउस के टेक्नोलॉजी पॉलिसी सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। सुब्रमण्यम ने 2019 में वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स का चुनाव जीता था। इसके बाद वह राज्य की सीनेट के सदस्य भी रहे। 2024 में उन्होंने पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई थी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों और भारतीय पेशेवरों से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों से मतदान में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की थी। उनका कहना था कि मौजूदा समय में समुदाय की आवाज और वोट पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
अरुणा मिलर ने वेस मूर के साथ दोहराई जीत
मैरीलैंड में भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने भी लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में एक और कार्यकाल हासिल किया है। वह डेमोक्रेटिक पार्टी के वेस मूर के साथ चुनाव मैदान में थीं। इस जोड़ी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डैन कॉक्स और उनके साथी उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराया। चुनाव के शुरुआती नतीजों में वेस मूर की दोबारा जीत की पुष्टि हुई, जिससे अरुणा मिलर का भी लेफ्टिनेंट गवर्नर पद पर कार्यकाल जारी रहेगा। अरुणा मिलर का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। वह अमेरिका में भारतीय मूल की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अमेरिकी नागरिकों, खासकर प्रवासी समुदायों से मतदान करने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के प्रशासन को जवाबदेह बनाने की अपील की थी। उनकी जीत से मैरीलैंड के राज्य नेतृत्व में भारतीय मूल के समुदाय का प्रतिनिधित्व बना रहेगा।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव ट्रंप के लिए क्यों अहम हैं?अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन्हें राष्ट्रपति और उनकी पार्टी के कामकाज पर जनता की राय जानने का अहम राजनीतिक संकेत माना जाता है। इन चुनावों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। कई राज्यों में गवर्नर और अन्य स्थानीय पदों के चुनाव भी इसी दौरान कराए जाते हैं। इन चुनावों का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इनके नतीजे अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल सकते हैं। अगर राष्ट्रपति की पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत गंवा देती है, तो सरकार के लिए कानून पास कराना और अपनी नीतियों को लागू करना मुश्किल हो सकता है। विपक्ष को प्रशासन के फैसलों की जांच, सुनवाई और निगरानी का अधिक अवसर मिलता है। 2026 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती है। शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दक्षिण कैरोलिना और नॉर्थ कैरोलिना में सीनेट की अहम सीटें जीती हैं। प्रतिनिधि सभा में भी पार्टी ने कुछ सीटों पर बढ़त बनाई है। हालांकि, सभी मुकाबलों के नतीजे आने और अंतिम बहुमत की स्थिति स्पष्ट होने में समय लग सकता है।
मिडटर्म चुनाव के नतीजे ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के किसी एक सदन में बहुमत हासिल करती है, तो राष्ट्रपति के फैसलों पर निगरानी और जांच की प्रक्रिया तेज हो सकती है। यही वजह है कि इन चुनावों को ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।