गाजा क्षेत्र में इजरायली सेना की ताबड़तोड़ फायरिंग ने हड़कंप मचा दिया। इस गोलीबारी में कम से कम 11 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें 13 साल के दो लड़के, तीन पत्रकार और एक महिला शामिल हैं। यह कार्रवाई अक्टूबर में हुए हमास और इजरायल के बीच संघर्ष विराम के बाद गाजा में इजरायली सेना की सबसे बड़ी हमलों में से एक मानी जा रही है। इस समय अमेरिका उस समझौते को बनाए रखने और इसके दूसरे चरण को लागू करने की कोशिश कर रहा था।
इजरायली सेना का बयानइजरायली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि मृतकों में तीन फिलिस्तीनी पत्रकार भी शामिल हैं, जो गाजा के एक विस्थापन कैंप के पास शूटिंग कर रहे थे। सेना का कहना है कि यह हमला तब हुआ जब उन्होंने कुछ संदिग्धों को देखा, जो ड्रोन चला रहे थे और उनके सैनिकों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
लेबनान में भी हमलाइसी बीच इजरायल की वायु सेना ने दक्षिणी लेबनान के तीन गांवों में हमले किए। इन ठिकानों के बारे में कहा गया कि ये आतंकी संगठन हिज़बुल्लाह के बुनियादी ढांचे का हिस्सा थे, जिनमें हथियार भंडारण सुविधाएं भी शामिल थीं। ये हमले पिछले साल के संघर्ष विराम के बाद से रोजाना की जाने वाली इजरायली सैन्य कार्रवाई का नवीनतम उदाहरण हैं।
मृत बच्चों की माताओं की प्रतिक्रिया
अल-अक्सा मार्टियर्स अस्पताल के अनुसार, हमले में 13 साल का एक लड़का, उसका पिता और 22 वर्षीय एक व्यक्ति मारे गए। नासिर अस्पताल ने बताया कि दूसरा 13 वर्षीय लड़का पूर्वी शहर बानी सुहेला में सैनिकों की गोली से मारा गया। लड़के की मां, सफा अल-शराफी ने बताया कि उनका बेटा खाना बनाने के लिए जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने गया था।
पत्रकारों को निशाना बनाया गयाइजरायली हमले में तीन पत्रकारों को ले जा रहे वाहन को भी निशाना बनाया गया। ये पत्रकार मिस्र सरकार समिति की ओर से संचालित नए विस्थापन कैंप की शूटिंग कर रहे थे। समिति के प्रवक्ता मोहम्मद मंसूर के अनुसार, यह हमला गाजा के नेत्जारिम इलाके में हुआ, जो इजरायली नियंत्रित इलाके से लगभग 5 किलोमीटर दूर था।
गाजा में बच्चों और नागरिकों की स्थिति
नासिर अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि दक्षिणी शहर खान यूनिस के मुवासी इलाके में गोली लगने से एक महिला की मौत हो गई। अल-अक्सा मार्टियर्स अस्पताल ने बताया कि एक अन्य हमले में तीन भाइयों की जान चली गई। संघर्ष विराम के बाद से गाजा में अब तक 100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसमें हाल के दिनों में हाइपोथर्मिया से मरने वाले दो शिशु भी शामिल हैं।