ईरान में बीते दो हफ्तों से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की भारी गिरावट के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन अब देशभर में फैल चुके हैं। कई बड़े शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही है। इन प्रदर्शनों के दौरान कई इलाकों में हिंसक झड़पों की भी खबरें सामने आई हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा कार्रवाई की गई, तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
‘हर गतिविधि पर पैनी नजर’, बोले ट्रंपईरान में जारी उथल-पुथल पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी उन शहरों में भी अपना दबदबा बना रहे हैं, जिनकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ईरानी सरकार पहले की तरह आम लोगों पर हिंसा और हत्याएं शुरू करती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के मुताबिक, “हम वहीं करारा प्रहार करेंगे, जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द महसूस होगा।”
ओबामा पर भी साधा निशानाट्रंप ने इस मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ओबामा के कार्यकाल में ऐसे मौके आए, जब अमेरिका ने कदम पीछे खींच लिए और उसी का फायदा उठाकर ईरानी सरकार ने अपने ही नागरिकों पर अत्याचार किए। ट्रंप ने दावा किया कि आज ईरान उन्हीं फैसलों की कीमत चुका रहा है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और हालात बिगड़ने पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
खामेनेई का पलटवार, दबाव में न झुकने का ऐलानवहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी दो हफ्तों से जारी प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार (9 जनवरी) को दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। खामेनेई ने आरोप लगाया कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन विदेशी ताकतों के इशारे पर कराए जा रहे हैं, जिनका मकसद ईरान के इस्लामी शासन को कमजोर करना और अस्थिरता फैलाना है।
इंटरनेट और कॉल सेवाओं पर लगाई गई रोकप्रदर्शनों की तीव्रता को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं सीमित कर दी गई हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल पर भी पाबंदियां लगा दी गई हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम अफवाहों और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इन प्रतिबंधों के जरिए जनता की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। कुल मिलाकर, ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।