अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेने के लिए रवाना होना था, लेकिन उनकी यात्रा की शुरुआत ही बाधा के साथ हुई। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति के विशेष विमान एयर फोर्स वन में इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खराबी सामने आई, जिसके चलते विमान को बीच रास्ते से ही वापस लौटाना पड़ा।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विमान को मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रूज़ पर सुरक्षित उतारा गया। राष्ट्रपति को किसी भी संभावित जोखिम से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया, ताकि वे वैकल्पिक विमान से अपनी आगे की यात्रा पूरी कर सकें।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस तकनीकी समस्या का दावोस यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि केवल विमान बदला गया है और राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही दूसरे विमान से स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना होंगे। यानी, दावोस दौरा रद्द नहीं हुआ है।
दावोस में जुटेंगे राजनीति और उद्योग जगत के दिग्गजस्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में इस बार वैश्विक राजनीति और कॉरपोरेट जगत की कई बड़ी हस्तियां शिरकत करने वाली हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन और एनवीडिया के प्रमुख जेन्सन हुआंग जैसे दिग्गज उद्योगपति भी इस मंच पर नजर आएंगे।
2020 के बाद पहली बार दावोस पहुंचेंगे ट्रंपडोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2020 में दावोस गए थे। इसके बाद यह पहला मौका होगा जब वे व्यक्तिगत रूप से WEF में शामिल होंगे। पिछले वर्ष उन्होंने व्हाइट हाउस में वापसी के तुरंत बाद वर्चुअल माध्यम से संबोधन किया था, जिसने वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी। इस बार ट्रंप के साथ अमेरिका का अब तक का “सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल” दावोस पहुंचने वाला है।
रिकॉर्ड संख्या में वैश्विक प्रतिनिधि होंगे शामिलWEF आयोजकों के मुताबिक, इस वर्ष करीब 3,000 प्रतिभागी दावोस में हिस्सा लेंगे। इनमें 400 से अधिक राजनीतिक नेता, लगभग 850 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सीईओ और तकनीकी क्षेत्र के करीब 100 शीर्ष विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह आंकड़ा दावोस के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े जमावड़ों में से एक माना जा रहा है।
ग्रीनलैंड विवाद के चलते डेनमार्क रहेगा अनुपस्थितहालांकि, इस बार एक अहम यूरोपीय देश दावोस से दूरी बनाएगा। डेनमार्क सरकार ने सम्मेलन में भाग न लेने का फैसला किया है। WEF के प्रवक्ता के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद और ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद यह निर्णय लिया गया।
कई प्रमुख वैश्विक नेता भी नहीं आएंगे दावोसइस साल दावोस में कई बड़े नामों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का नाम पहले सूची में शामिल था, लेकिन बाद में उनके न आने की पुष्टि हो गई। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी WEF में भाग नहीं लेंगे। इसके अलावा भारत और ब्राज़ील के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति भी इस बार नहीं होगी।